सिवनी (नईदुनिया प्रतिनिधि)। लगातार वर्षा से मक्का फसल की वृद्धि रूक गई है।इसका असर उपज पर पड़ने की बात किसान कह रहे हैं। किसानों का कहना है कि, पीली पड़ने के साथ ही मक्का फसल पर संकट गहराने लगा है।करीब एक सप्ताह बाद बुधवार को दिनभर जिला मुख्यालय व आसपास के क्षेत्रों में धूप तपी रही। इससे मक्का सहित सोयाबीन, मूंग व अन्य दलहनी फसलों को फायदा मिलेगा। कृषि विज्ञानियों का कहना है कि, बीते दिनों हुई अच्छी वर्षा से जिले में बहुतायत में बोई गई धान फसल को लाभ हुआ हैं।कहीं भी फसलों में नुकसानी की जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। जबकि मक्का फसल में पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस की कमी दिख रही है।

कहीं कहीं फाल आर्मी वर्म कीट का प्रकोप भी हैं।इससे फसल की वृद्धि रुक रही है।साथ ही पौधे पीले पड़ रहे हैं।कृषि विज्ञानियों का कहना है कि, मौसम साफ हो गया है।ऐसे में किसानों द्वारा यदि मक्का फसल में पानी में घुलनशील एनपीए 1919 अथवा नैनो यूरिया का छिड़काव किया जाता है, तो पौधे पुनः तेजी से वृद्धि करने लगेंगे और उपज प्रभावित नहीं होगी।वर्तमान में धान की में ब्लास्ट रोग के साथ तना छेदक कीट का प्रकोप देखा जा रहा है।गौरतलब है कि जिले के डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में इस साल मक्का फसल किसानों ने लगाई है।लगातार वर्षा के कारण कई गांव में मक्का फसल के पौधों की वृद्धि रूक गई, वहीं जिन खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था नहीं ऐसे खेतों में पौधे की पत्तियां पीली पड़ने के साथ उसमें जड़सड़न रोग भी देखा जा रहा है।

क्या करें किसानः मक्का फसल में जीवाणु, तना सड़न रोग से पौधा टूटकर जमीन पर गिर जाता है। इस रोग में खेतों में प्रवेश करने पर सड़े हुए पौधों से बहुत खराब दुर्गंध आती है। ऐसी स्थिति में खेतों में जल निकास का उचित प्रबंध करें। मक्का की खडी फसल में पौधों की जडों के नजदीक ब्लिचिंग पाउडर (33 प्रतिशत) 3 ग्राम 10 लीटर पानी में घोल बनाकर पौधों की जडों के पास मिट्टी में तर करें और फिर 7 दिन बाद यहीं प्रक्रिया पुनः दोहराएं।मक्का की फसल में कुछ क्षेत्रो में निचले पत्तियों का सुखना रोग देखा जा रहा है।नियंत्रण के लिए मैंकोजेब 75 प्रतिशत दवा का 400 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 150 लीटर पानी में घोल बनाकर पौधों पर छिड़काव करें।

इनका कहना है

अच्छी वर्षा से धान की फसल को फायदा मिला है।मक्का फसल में पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस की कमी दिख रही है।खेतों में लंबे समय तक पानी का भराव होने से पौधों की वृद्धि रूक गई है, साथ ही पत्तियां पीली पड़ गई है।किसानों को नैनो यूरिया अथवा एनपीए का छिड़काव मक्का फसल में करने के साथ ही पानी निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए।मौसम साफ होने से मक्का फसल पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

एनके सिंह विज्ञानी, कृषि विज्ञान केंद्र

लगातार वर्षा से जिले में लगाई गई मक्का की फसल में पीली पड़ने व वृद्धि रूकने की जानकारी किसानों से मिल रही है।फिलहाल कहीं से भी खेतों में पानी का भराव होने की फसल खराब होने की जानकारी नहीं मिली है।

मोरिश नाथ, कृषि उपसंचालक

कृषि कल्याण विभाग सिवनी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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