सिवनी, नईदुनिया प्रतिनिधि। भूकंप के हल्के झटकों का मुख्य कारण भू-गर्भीय हलचल है। जमीन की गहराई में बेसाल्ट पत्थर की लेयर मौजूद है। बारिश का पानी दरारों से भू-गर्भ में पहुंचता है, जिससे कई तरह के बदलाव आते हैं। इसका परिणाम भूकंप के रूप में जमीन की सतह पर समाने आता है। जबलपुर भू-सर्वेक्षण विभाग के भू-विज्ञानी एमएस पठान ने गुरूवार 29 अक्टूबर को जिला मुख्यालय का दौरा कर आमजनों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। भू-विज्ञानी एमएस पठान व गौतम राजपूत ने डूंडासिवनी, छिड़िया पलारी सहित शहर के अन्य क्षेत्रों का दौरा कर लोगों की भ्रंतियों को दूर किया।

एक्टिव जोन में सिवनी जिला: उन्होंने स्पष्ट किया कि सिवनी जिला संवेदनशील (एक्टिव जोन) में है। सोन नदी व नर्मदा बेसिन में होने के कारण जिले में हल्के भूकंप की आशंका बनी रहती है। इससे लोगों को घबराने या डरने की जरूरत नहीं है। हालांकि इसके बावजूद यहां बड़े भूकंप की आशंका बेहद कम है। भू-विज्ञानी पठान ने कहा कि भूकंप के संबंध में किसी तरह भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। इसलिए लोगों को सर्तक व एहतियात के साथ रहना चाहिए। शहर में भ्रमण से पहले भू-सर्वेक्षण जबलपुर के दल ने कलेक्टर डाॅ. राहुल हरिदास फटिंग, पुलिस अधीक्षक कुमार प्रतीक, अतिरिक्त कलेक्टर सुनीता खंडाइत, डिप्टी कलेक्टर एच घोरमारे इत्यादि से चर्चा कर अधिकारियों को वस्तु स्थिति से अवगत कराया।

15 किमी गहराई में था केंद्र: नईदुनिया से चर्चा में भू-विज्ञानी पठान ने बताया कि 27 अक्टूबर की सुबह 3.3 रिक्टर तीव्रता के भूकंप का केंद्र 15 किलोमीटर गहराई था, यह कम तीव्रता का भूकंप था। भू-गर्भ में इंडियन प्लेट उत्तर पूर्व की ओर खिसक रही हैं। इससे गहराई में कई तरह के बदलाव हो रहे हैं। प्लेटों के खिसकने से भू-गर्भ में तनाव व दबाव बढ़ता है, जो अर्थक्वेक के रूप में सामने आता है।

1 नवंबर तक चलेगा सर्वे: भू-विज्ञानी पठान ने बताया कि जिले के कमजोर हिस्सों का डाटा तैयार करने 21 अक्टूबर से भू-सर्वेक्षण विभाग की टीम सर्वे का काम कर रही है। लखनादौन में 21 से 27 अक्टूबर तक मशीन लगाकर भू-गर्भीय हलचल को रिकार्ड किया गया है। 1 नवंबर तक कुरई में भू-गर्भ में हो रही हलचल का डाटा दर्ज कर इसका विशलेषण किया जाएगा। यह सर्वे पहले से तय कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है। इससे संबंध हाल ही में आए भूकंप के झटकों से नहीं है।

नहीं है भूकंपीय मीटर की जरूरत: भू-विज्ञानी पठान ने बताया कि एक दिन या सप्ताह में कई बार झटके महसूस होने पर भूकंपीय मीटर जिले में लगाना उचित होगा। फिलहाल इससे जरूरत नहीं है क्योंकि जबलपुर में स्थित भूकंपीय (सिस्मोलाॅजी) मीटर में भू-गर्भ की हर तरह की हलचल दर्ज हो रही है। सिवनी में 27 अक्टूबर की सुबह आया भूकंप जबलपुर के भूकंपीय मीटर में दर्ज किया गया है।

दूर की लोगों की भ्रंतियां: जिला प्रशासन ने भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल व भारतीय भू सर्वेक्षण विभाग से तत्काल विशेषज्ञ दल भेजकर भूकंप की घटनाओं की जांच कराने का आग्रह किया था। गुरूवार को दो सदस्यीय ने सिवनी नगर के विभिन्न हिस्सों व आसपास के गांव का दौरा कर नागरिकों की भ्रंतियों को दूर किया। डूंडासिवनी थाने में थाना प्रभारी देवकरण डहेरिया, एसडीएम अंकुर मेश्राम सहित अधिकारियों की मौजूदगी में विशेषज्ञ दल ने नागरिकों से चर्चा कर उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराया।

Posted By: Ravindra Suhane

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