Seoni News : सिवनी (नई दुनिया प्रतिनिधि)। पेंच नेशनल पार्क में वन्यप्राणी आंकलन (गणना) के लिए साक्ष्य जुटाने का काम सोमवार से शुरू हो गया है। पहले दिन राष्ट्रीय उद्यान की सभी 109 बीट में प्रशिक्षण वनकर्मियों के दल ने करीब पांच से छह किमी ट्रांजिट लाइन पर पैदल चलकर मांसाहारी वन्यजीवों की मौजूदगी के साक्ष्य जुटाए। पहले दिन खवासा बफर क्षेत्र की आमाझिरी बीट में रेंजर सुमित रेगे व सर्वे दल के साथ विधायक दिनेश राय ने पांच किलोमीटर पैदल चलकर गणना में भागीदारी की। सर्वे के दौरान वन कर्मियों को बाघ के साथ साथ लेपर्ट, सोनकुत्ता, जंगली बिल्ली इत्यादि के पंजे के निशान व अन्य साक्ष्य देखने को मिले जिसे निर्धारित फार्म में दर्ज किया गया। पेंच राष्ट्रीय उद्यान के सभी कोर व बफर क्षेत्र में अधिकारियों के साथ वनकर्मियों व सुरक्षा श्रमिक 25 जनवरी तक मांसाहारी वन्यजीवों का आंकलन करेंगे।27 से 29 जनवरी तक शाकाहारी वन्यजीवों की गणना का कार्य किया जाएगा।

फरवरी में लगेगा कैमरा ट्रेप

पहले लाइन ट्रांजेक्ट सर्वे, बाद में साइन सर्वे और तीसरा चरण कैमरा ट्रेप होगा।फरवरी में जंगल में कैमरे लगाएं जाएंगे। इस बार 700 से अधिक कैमरों की मदद से गणना होगा। कैमरे 400 ग्रिड में लगाए जाएंगे। हालांकि एक साथ कैमरे नहीं लगेंगे। गणना की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बल्कि जल्दी और बेहतर तरीके से गणना के काम करने जोर दिया जा रहा है। ज्ञात हो कि हर टाइगर रिजर्व का सालाना ग्रोथ देखने के लिए वन्यप्रााणियों की गणना का काम होता है ताकि उसके आधार पर क्षेत्र पर अन्य काम कराने की योजना तैयार हो सके। वर्ष 2018 से जीपीएस और एप की मदद से गणना का काम किया जा रहा है।साइंटिफिक पद्धति कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए काफी मददगार बन गई। इससे बेहतर साक्ष्य एकत्रित हो जाते हैं और किसी भी प्रकार की गलती होने की संभावना नहीं रहती।साथ ही सभी रिकार्ड आसानी से फीड किए जा सकते हैं। वन्यजीवों की गणना के लिए पहले ही सभी कर्मचरियों प्रशिक्षण दिया गया है।

घने जंगल में मीलों पैदल चल वनकर्मी

घने व सुनसान जंगल में मीलों पैदल चलकर वनकर्मियों ने सोमवार को पेंच नेशनल पार्क में मांसाहारी वन्यजीवों के साक्ष्य जुटाए। जंगल की ट्रांजिट लाइन पर पैदल चलने पर कई जगह पर बाघ सहित दूसरे वन्यजीवों के साक्ष्य देखे गए।मैदानी अमले ने सुबह उजाला होते ही एक साथ कोर व बफर क्षेत्र की सभी 109 बीट में एक समय पर पैदल चलकर गणना करना शुरू कर दिया।करीब चार से पांच घंटे तक प्रत्येक बीट में वन कर्मियों (तीन सदस्यीय दल) ने पांच-छह किमी पैदल चल वन्यजीवों के साक्ष्य जुटाए गए। बाघ व दूसरे मांसाहारी वन्यजीवों के पगमार्ग, विस्टा, खरोंच के निशान की जानकारी एप में दर्ज की गई। बाद में विश्लेषण किया जाएगा। कोर एरिया में आधुनिक ई-मोबाइल व बफर एरिया में गणना के लिए जीपीएस सैट की मदद ली जा रही है।

हर तरफ महसूस हुई मौजूदगी

गणना में जंगल के नालों, पहाड़ी व मैदानी इलाके सहित घने वनक्षेत्र में कदम-कदम पर बाघ व दूसरे वन्यजीवों की मौजदूगी महसूस होती है। पेड़ों से गिरे सूखे पत्तों की सरसराहट व कदमों की आहट सुनते ही वन्यजीव झाड़ियों में छिप जाते हैं। बाघ के पगमार्क, खरोंच व विस्टा के निशान देखकर ही वनकर्मी समझ जाते हैं कि बाघ किस दिशा में बढ़ रहा है और उसके निशान कितने पुराने हैं। पारदर्शिता बढ़ाने आम लोगों व एनजीओ के सदस्यों को भी गणना में शामिल किया गया।वन्यजीवों की गणना के कारण पेंच पार्क के सभी गेट एक घंटे देरी से खोले गए।पर्यटकों को सफारी के लिए सुबह इंतजार करना पड़ा। बाद में गेट से प्रवेश लेकर पर्यटकों ने जंगल की सफारी का आनंद लिया।साक्ष्य के विश्लेषण के बाद पेंच में बाघ, तेंदुआ, जंगली बिल्ली, सियार, हिरण, लंगूर, जंगली सूअर, बायसन सहित अन्य वन्यजीवों की संख्या पता चलेगी। गणना के परिणाम आने में तीन से चार माह का वक्त लग सकता है।

Posted By: Jitendra Richhariya

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