सिवनी। नईदुनिया प्रतिनिधि। चिटफंड कंपनी में मासिक जमा योजना (आरडी) व फिक्स डिपाजिट के नाम पर जिलेवासियों से करीब 25 करोड़ स्र्पये की राशि जमा कराने के बाद फरार कंपनी के पांच कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कंपनी के एक संचालक महेंद्र पिता जमुना प्रसाद साहू (36) झांसी उत्तरप्रदेश निवासी को कोतवाली पुलिस झांसी से गिरफ्तार कर सिवनी ले आई है।

अन्य चार कर्मचारियों को जिले के अलग अलग थाना क्षेत्रों से गिरफ्तार किया गया है। इनमें भैरोगंज निवासी विनोद पिता रामदयाल साहू (37), पलारी निवासी स्र्पेश पिता महेश साहू (35), डुंगरिया निवासी गणेश पिता फूकचंद साहू (33) व पलारी निवासी संदीप पिता ओमकार सोनी (29) शामिल हैं।

2014 से काम कर रही थी कंपनी- सिवनी एसडीओपी पास्र्ल शर्मा, कोतवाली नगर निरीक्षक महादेव नागोतिया ने चिटफंड कंपनी का पर्दाफाश करते हुए बताया कि उत्कल मल्टीस्टेट क्रेडिम कॉपरेटिव सोसायटी (पिनकॉन ग्रुप) 2014 से जिले में काम कर रही थी।

बारापत्थर के कार्पाेरेशन बैंक के नीचे चिटफंड कंपनी का ऑफिस संचालित होता था। जिसमें शहर व जिले के कई लोगों को एजेंट के तौर पर आम लोगों की जमा पूंजी जमा कराने के लिए रखा गया था। चिटफंड कंपनी का क्षेत्रीय कार्यालय सागर जिले में संचालित था। एजेंटों की मदद से शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के भोलेभाले लोगों से मासिक जमा योजना के तहत राशि जमा कराई गई थी।

साल 2018 तक विभिन्न् योजनाओं का प्रलोभन देकर कंपनी के कर्मचारियों ने जिलेवासियों से करीब 25 करोड़ स्र्पये की राशि जमा करा ली थी। इसके बाद कर्मचारी ऑफिस बंद कर जिले से फरार हो गए थे। इस मामले की शिकायत आदेगांव निवासी प्रदीप पिता रामकुमार साहू, अनिल पिता सोमनाथ नेमा सहित अन्य लोगों ने 11 अक्टूबर 2019 को दर्ज कराई थी। इस पर कोतवाली पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ धारा 420, 34 भादंवि के तहत प्रकरण दर्ज कर मामले को जांच में लिया था।

आरोपितों की तलाश में लगी थी पुलिस- एसडीओपी पास्र्ल शर्मा ने बताया कि एसपी कुमार प्रतीक, एएसपी कमलेश खरपुसे के निर्देशन में चिटफंड कंपनियों पर अंकुश लगाने के प्रयास किए जा रहे थे। साइबर सेल की मदद से कंपनी से जुड़े कर्मचारियों की तलाश पुलिस कर रही थी।

इसी दरम्यान पुलिस को पता चला कि उत्कल मल्टी कॉपरेटिव सोसायटी में लोगों का स्र्पया जमा कराने वाला मुख्य आरोपित व एजेंटों का टीम लीडर महेंद्र साहू उत्तरप्रदेश झांसी निवासी है। जिसके झांसी में छिपे होने की सूचना मिलने पर पुलिस टीम को आरोपित की गिरफ्तारी के लिए झांसी भेजा गया। कोतवाली पुलिस टीम आरोपित को झांसी स्थित घर से गिरफ्तार कर सिवनी ले आई है। साथ ही कंपनी में कर्मचारी व एजेंट के तौर पर काम करने वाले चार आरोपितों को पुलिस ने प्रकरण में सह आरोपी बनाया है।

कमीशन का दिया लालच- जानकारी के मुताबिक चिटफंड कंपनी में राशि जमा कराने वाले एजेंटों को चार व पांच प्रतिशत की राशि बतौर कमीशन दी जाती थी। मासिक जमा योजना के तहत आरडी स्कीम में लोगों से एक साल में 18 हजार स्र्पये की राशि जमा कराकर कंपनी 19750 स्र्पये लौटाने का प्रलोभन देती थी। साल 2014 में शुस्र् हुई चिटफंड कंपनी ने साल 2016 तक लोगों से जमा कराए गए स्र्पये लोगों को कंपनी ने वादे के मुताबिक लौटाए थे। कंपनी पर लोगों का भरोसा बनने के बाद 2016 के बाद जमा कराई गई राशि अब तक निवेशकों को नहीं लौटाई गई है।

नोटबंदी के दौरान लोगों ने जमा कराए लाखों स्र्पये- गौरतलब है कि साल 2017 में केंद्र सरकारी नोटबंदी के दौरान लोगों ने दो साल से पांच साल तक के फिक्स डिपॉजिट के लिए लाखों स्र्पये कंपनी में जमा कराए। इसके बाद साल 2018 आते ही कंपनी ने अपना बारापत्थर स्थित ऑफिस बदल लिया। कुछ दिनों तक लूघरवाड़ा क्षेत्र में ऑफिस संचालित किया गया इसके बाद कंपनी के कर्ताधर्ता व संचालक ऑफिस बंद कर फरार हो गए। परेशान निवेशकों व एजेंटों ने मामले की शिकायत कोतवाली थाने में दर्ज कराई थी।

आरोपितों के पास से नहीं मिली नगदी राशि- कोतवाली पुलिस ने चिटफंड कंपनी के पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन जांच के दौरान पुलिस को आरोपितों के कब्जे से नगद राशि नहीं मिली है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कंपनी की संपत्ति व खातों की जांच की जा रही है। कोर्ट के निर्देश पर इस मामले में आगे की कार्रवाई जारी रहेगी। चिटफंड कंपनी के आरोपितों को गिरफ्तार करने में एसडीओपी पास्र्ल शर्मा, कोतवाली थाना प्रभारी महादेव नागोतिया, एसआई जितेंद्र गढ़वाल, रंजीत धुर्वे, कोतवाली स्टाफ व साइबर टीम की मुख्य भूमिका रही।

200 से ज्यादा एजेंट कर रहे थे काम- जानकारी के मुताबिक कंपनी में निवेश के लिए जिले व आसपास के क्षेत्रों में करीब दो सौ एजेंट काम कर रहे थे। धनौरा, लखनादौन, आदेगांव, भीमगढ़, सुनवारा, गनेशगंज, मंडला के नैनपुर, जबलपुर इत्यादि क्षेत्रों से राशि जमा कराई गई थी। धनौरा के रामस्वस्र्प यादव ने 90 लाख, आदेगांव के अनिल नेमा ने 50 लाख, देवरीकला के मनोज दुबे ने 45 लाख, लखनादौन के दीपक लखेरा ने 25 लाख, मनोज सोनी ने 25 लाख, नैनपुर के मानक अवधवाल ने 3 लाख 80 हजार, अकल सिंह वरकड़े ने 10 लाख की राशि कंपनी में जमा कराई थी। इसके अलावा इसी तरह कई लोगों ने निवेशकों के पांच से 25 लाख स्र्पये तक की राशि चिटफंड कंपनी में जमा कराए थे जो अब तक वापस नहीं हुए हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

ipl 2020
ipl 2020