सिवनी(नईदुनिया प्रतिनिधि)। एक पखवाड़े बाद जाते सावन में रविवार को तपती दोपहर में अचानक मानसून मेहरवान होकर बरसा। करीब दो घंटे तक रूक-रूक हुई बारिश से क्षेत्र के किसानों को राहत मिली है। हालांकि बारिश की कमी के कारण अब भी धान के खेत प्यासे है। पिछले एक पखवाड़े से बारिश न होने के कारण सूख रहे खेतों व फसलों को बचाने किसान मोटर पंप से सिंचाई कर रहे थे। लखनादौन, धूमा व घंसौर में तो सूखे के हालात बनने लगे हैं। अल्पवर्षा के कारण इन क्षेत्रों में फसलें सूखने की कगार में हैं। कम बारिश के कारण करीब 30 हजार हेक्टेयर रकबे में धान का रोपा नहीं लग सका है। लक्ष्य से सत्तर फीसदी धान रोपाई हो सकी है।

असिंचित है कृषि क्षेत्रः मानसून के रूठने से बिगड़ रहे हालातों पर लखनादौन विधायक योगेंद्र सिंह ने कलेक्टर राहूल हरिदास फटिंग को पत्र भेज कर विधानसभा को सूखा प्रभावित करने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि लखनादौन विधानसभा का अधिकतम कृषि क्षेत्र असिंचित व बारिश पर आधारित है। सिंचाई के साधन न होने के कारण किसानों को बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है। इस साल अल्प वर्षा होने से विधानसभा सहित जिले के कई गांव के किसानों की फसलें भी सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। अल्प वर्षा के कारण क्षेत्र के जलाशय में पानी संग्रहित नहीं हुआ है। लखनादौन विधानसभा व जिले के गांव का जिला स्तरीय दल गठित कर किसानों का फसल वार सर्वे कराकर मुआवजा भुगतान करने की मांग पत्र में जिला प्रशासन से की गई है।

लखनादौन में कम बारिश : इस साल 2 अगस्त सुबह तक जिले में 533.6 मिमी औसत बारिश हुई है। पिछले साल 438.4 मिमी औसत बारिश हुई थी। जिले में 95.2 मिमी ज्यादा औसत बारिश हुई है। 1 जून से अब तक पिछले साल की तुलना में ज्यादा औसत बारिश दर्ज की जा चुकी है। इस साल बोवनी के समय जून माह में ज्यादा औसत बारिश हुई है। जबकि जुलाई का दूसरा पखवाड़ा सूखा बीतने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। लखनादौन तहसील में 400 मिमी बारिश हुई है। पिछले साल इस अवधि तक 500 मिमी बारिश लखनादौन में दर्ज की गई थी। यहां 100 मिमी बारिश कम हुई है।

कहीं राहत, कहीं बढ़ा संकटः रविवार को जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में हुई बारिश से किसानों को राहत मिली है। हालांकि अब भी जिले के कुछ हिस्सों में सूखे के हालात बने हुए हैं। धूमा, लखनादौन, आदेगांव, घंसौर क्षेत्र में मानसून के मेहरबान न होने के कारण फसलों के सूखने का संकट गहराता जा रहा है। वहीं बरघाट व अरी क्षेत्र में रविवार को हुई बारिश से धान उत्पादक किसानों को राहत मिली है।

4.10 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलः जिले में खरीफ का रकबा बढ़कर 4.10 लाख हेक्टेयर हो गया है। पेंच परियोजना की नहरों के साथ ही विभिन्न बांधों का निर्माण होने से असिंचित क्षेत्र में भी फसलों की बुआई होने लगी है। किसानों ने 2 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में मक्का की फसल लगाई है। जबकि करीब 1.60 लाख हेक्टेयर रकबे में धान की फसल लगाई जाती है। करीब 60 हेक्टेयर रकबे में कतार पद्घति से धान की फसल जुलाई महीने में ही लगाई जा चुकी है। जबकि करीब 1 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में रोपा पद्घति से धान लगाई जाती है। कम बारिश के कारण अब भी 30 हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में धान का रोपा लगाया जाना बाकी है, जिसके खराब होने का डर किसानों को सता रहा है। जिले के कुरई, बरघाट व सिवनी के कई इलाकों में रोपाई विधि से धान की खेती की जाती है।

जिले में खरीफ फसल की बोवनी

फसल लक्ष्य

धान 1.60 लाख

मक्का 1.63 लाख

सोयाबीन 30 हजार

अरहर 18 हजार

उड़द 15 हजार

मूंग 5 हजार

मूंगफली 5 हजार

कुल 4.10 लाख हेक्टेयर

तहसील 2 अग. 20 तक 2 अग. 19 तक अधिक/कम

सिवनी603.0389.0़+214.0

कुरई617.0255.0+362.0

बरघाट 696.8658.5+38.3

केवलारी560.6481. 4+79.2

छपारा 585.0501.1+83.9

लखनादौन400.0500.0-100.0

धनौरा 392. 6367.2+25.4

घंसौर414.0355.0+59.0

कुल बारिश 4269.03507.4+761.8

औसत बारिश 533.6438.4+95.2

नोट :- बारिश का आंकड़ा मिमी में। 2 अगस्त 2020 तक भू-अभिलेख रिकार्ड अनुसार।

Posted By: Nai Dunia News Network

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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