Seoni News: छपारा (नईदुनिया न्यूज)। एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के भीमगढ़ बांध से पिछले साल जुलाई अंत में अतिवृष्टि के बाद छोड़े गए दो लाख क्यूसिक पानी से आई बाढ़ ने क्षेत्र में तबाही मचा दी थी। कई सड़कें, पुल व मकान बाढ़ में ताश के पत्तों की तरह ढह गए थे। इस दौरान भीमगढ़ कॉलोनी भुमका बाबा से भीमगढ़ गांव को जोड़ने वाली करीब 500 मीटर लंबी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क बाढ़ में बह गई थी।

ग्रामीणों को आवागमन में हो रही समस्या को देखते हुए अर्जेंट मद से करीब चार सौ मीटर कच्ची सड़क का निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के ठेकेदार द्वारा कराया गया था। एक साल से कम समय में यह कच्ची सड़क भी बारिश शुर्स् होते ही दलदल व गड्डों में तब्दील हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक वनक्षेत्र से होते हुए आवागमन के लिए बनाई गई 400 मीटर लंबी सड़क व पुलिया पर करीब 26 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

29 जुलाई 2020 को भीमगढ़ में आई भीषण बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई भीमगढ़ कॉलोनी सड़क से कुछ दूरी पर नई सड़क बनाने की स्वीकृति कलेक्टर द्वारा विभाग के अर्जेंट फंड से दी गई थी। लेकिन बाढ़ प्रभावितों को राहत देने के लिए दोबारा बनाई गई सड़क भी बारिश आते ही गड्डों में तब्दील हो गई है। क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि सड़क में एक पुलिया का निर्माण भी ठेकेदार द्वारा कराया गया है।

घटिया सड़क दयनीय स्थिति में पहुंच गई है। इसमें सड़क के ऊपरी हिस्से में डस्ट ही नजर आ रही है। गड्डों में तब्दील सड़क पर चलना ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। क्षेत्रवासी इस मामले की शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से लगातार कर रहे हैं, लेकिन अब तक किसी तरह का कोई सुधार नहीं हुआ है। मजबूर होकर ग्रामीणों को स्वयं ही सड़क को चलने लायक बनाना पड़ रहा है। कई ग्रामीणों ने भीमगढ़ से कॉलोनी जाने वाले मार्ग के गड्डों को भरने का काम शुरू कर दिया है ताकि बारिश अथवा रात के अंधेरे में सड़क पर होने वाले हादसों को रोका जा सके।

भीमगढ़ गांव निवासी संतोष सोनी व अन्य ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन सड़क की सुध कब लेगा इसकी उम्मीद दिखाई नहीं दे रही है। ग्रामीण स्वयं जितना हो सके सड़क का सुधार कार्य कर रहे हैं। ताकि आवागमन बाधित ना हो। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खराब होने के कारण बीते दिनों एक मासूम बच्ची को समय पर अस्पताल इलाज के लिए नहीं पहुंचाया जा सका जिसके कारण उसकी मौत हो गई थी। ऐसी घटना दोबारा ना हो इसलिए ग्रामीण स्वयं सड़क के गड्डों को भरने का प्रयास कर रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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