छपारा। जनपद पंचायत के अंतर्गत चमारी खरीदी केंद्र में बंपर आवक को देखते हुए किसानों को सुविधा जनक ढंग से खरीदी की जा सके। इसको लेकर क्षेत्र में विगत कुछ वर्षों पहले चमारी से कुछ दूरी पर स्थित खाली जगह पर गेंहू की खरीदी समिति द्वारा प्रारंभ की गई थी। इस समय असमतल भूमि को आनन फानन में खरीदी प्रभारी द्वारा समतल करा कर विगत पांच वर्षों से खरीदी की जा रही हैं।

ग्राम पंचायत डांगावानी द्वारा समर्थन मूल्य पर उपार्जन केंद्र में पक्का चबूतरा का निर्माण वर्ष 2020-21 में मनरेगा से स्वीकृत किया गया था, जो अधूरा पड़ा हुआ हैं। जिस जमीन पर पंचायत द्वारा पक्के चबूतरे का निर्माण कराया गया हैं वह जमीन वन क्षेत्र में होने के कारण नया विवाद सामने आ गया हैं। इसको लेकर वन अधिकारियों का कहना है कि पुराने नक्शे के हिसाब से यह भूमि वन विभाग हैं।विभाग द्वारा प्लांटेशन नहीं कराने के कारण भूमि खाली पड़ी थी और आसपास के किसानों की मांग को देखते हुए विभाग ने यह जमीन अस्थायी रूप से खरीदी करने के लिए दी गई थी, ना कि पक्का निर्माण कराने। इसकी विधिवत अनुमति वन विभाग से लेनी होती है जो ग्राम पंचायत द्वारा वन विभाग से नहीं ली गई हैं। इसलिए वन अमले ने पंचनामा बनाकर निर्माण कार्य पर रोक लगा दी हैं।

चबूतरा निर्माण करने हेतु कार्ययोजना बनाकर ग्राम पंचायत ने 8.80 लाख रूपये की स्वीकृति ली गई हैं। इसमें से मजदूरी व मटेरियल के नाम लगभग 5 लाख रुपये का आहरण भी हो चुका हैं। जबकि मौके पर चबूतरा के नाम पर सिर्फ दो तरफ से नींव उठा कर मुरम फिलिंग कर दीं गई। इस अधूरे निर्माण कार्य पर वन अमले ने विधिवत पंचनामा बनाकर रोक लगा दी हैं।चबूतरा देखकर कोई भी बिना तकनीकी व्यक्ति भी कह सकता हैं कि 5 लाख रुपये कैसे चबूतरे पर खर्च हो गए हैं

ऐसे में सवाल उठा रहा है कि ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के तकनीकी अमले ने वन क्षेत्र में निर्माण कार्य कैसे शुरू करवा दिया। वहीं जनपद के सीईओ व आरईएस के एसडीओ ने भी जायजा नहीं लिया।सरपंच व सचिव मनमर्जी से लाखों रुपये निर्माण कार्य के नाम पर खर्च कर डाले। इस कार्य का भौतिक सत्यापन कराने की मांग क्षेत्रवासियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से की हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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