सिवनी, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिले के छोटे से गांव मारबोड़ी निवासी शिक्षक के बेटे अभिषेक को बड़ी कामयाबी हासिल की है। जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने कभी हौसला नहीं खोया व कामयाबी की इबारत लिखी। 3 दिसंबर शनिवार को विज्ञान भवन नईदिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में होनहार अभिषेक ठाकुर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सम्मानित किया।

राष्ट्रपति ने उन्हें वर्ष 2021-22 में दिव्यांगता के क्षेत्र में श्रेष्ठ दिव्यांगजन श्रेणी में राष्ट्रीय पुरुस्कार से सम्मानित किया है। बता दें, अभिषेक सिवनी के मारबोडी निवासी शिक्षक ठाकुर राजकुमार सिंह व पत्नी विनीता ठाकुर के छोटे पुत्र हैं, जो जन्म से ही दृष्टिबाधित हैं।

कभी नहीं हारी हिम्मत...

दृष्टिबाधित होने के बावजूद भी अभिषेक ठाकुर ने अपने सतत प्रयास, हौंसले, संघर्ष, कठिन, परिश्रम और त्याग से इस उपलब्धि को हासिल किया है। अभिषेक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नागपुर, जबलपुर व दिल्ली, मुंबई में पूरी की है। अभिषेक ठाकुर वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य विभाग में वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उनके पास टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज, मुंबई इंडिया से एमफिल व मास्टर डिग्री है। वह प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस कालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र भी हैं। पूर्व में टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज दिल्ली के द्वारा वर्ष 2011 में उन्हें उनकी उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किए गए थे।

दिव्यांगजनों को रोजगार दिलाया

अभिषेक भारत के दो बड़े गैर सरकारी संगठन, जो विकलांगता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। नेशनल एसोसिएशन फार द ब्लाइंड और ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन इसमें बोर्ड सदस्य भी हैं। साथ ही वे भारत द्वारा स्थापित विकलांगता रोजगार पर विशेषज्ञ समिति के सदस्य हैं और विकलांगता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। अभिषेक ने टास्क फोर्स कमेटी, राष्ट्रीय कौशल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के सदस्य के रूप में कार्य किया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थान के लिए रिसर्च किया है और विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रशिक्षुता के रूप में भी उन्होंने कार्य किया। उनके द्वारा 4 रोजगार मेलों का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न श्रेणियों के दिव्यांगजनों को रोजगार उपलब्ध कराया गया।

Posted By: Prashant Pandey

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