सिवनी।जिले के सभी विकासखंडों में पिछले साल की तुलना में 16 अगस्त को दो गुना वर्षा रिकार्ड की गई है।सिवनी भू-अभिलेख कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अब जिले के आठ विकासखंडों में 1016.1 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है।बीते साल 16 अगस्त तक 482.7 मिमी वर्षा दर्ज हुई थी।इस साल 578.4 मिमी औसत वर्षा अधिक दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 46 प्रतिशत अधिक है। सबसे ज्यादा वर्षा छपारा, सिवनी, कुरई, बरघाट में रिकार्ड की गई है।इसकी सूचना राहत आयुक्त सहित सभी वरिष्ठ कार्यालय को भेजी गई है।मंगलवार को तीन दिन बाद बादलों से सूर्यदेव बाहर आए। इसके बाद मुख्यालय में लोगों ने राहत महसूस की। हालाकि जिले के बरघाट, कुरई, घंसौर, लखनादौन सहित अन्य क्षेत्रों में मंगलवार को भी रूक-रूककर बरसात होती रही।बीते तीन दिनों से मुख्यालय समेत जिले के ग्रामीण अंचल में लगी वर्षा की झड़ी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है।शनिवार रात से शुरू हुआ रिमझिम व तेज वर्षा का दौर मंगलवार सुबह तक जारी रहा, इससे जिले की अधिकांश नदी नाले उफान पर हैं।नालों में बाढ़ के कारण गांव के कई पुल-पुलिया पानी में डूब गए हैं।इससे गांव के बीच सीधा संपर्क टूट गया है।वहीं राहगीरों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्कूल भवन के लेटर से टपक रहा पानीः जनपद पंचायत सिवनी अंतर्गत ग्राम पंचायत भाटीवाड़ा के शासकीय प्राथमिक शाला सिमरिया का स्कूल भवन अत्यधिक जर्जर हो गया है।5 कमरों का स्कूल भवन जर्जर हो गया है।अनवरत वर्षा से कमरों के लेंटर से पानी टपक रहा है।छत से टपक रही बूंद के कारण कमरों में पानी जमा हो रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के अध्यापन का संकट खड़ा हो गया है।वहीं दो कमरे के कमजोर लेंटर की छत खतरनाक स्थिति में जो कब अध्यानरत बच्चों के ऊपर गिर जाए इसका कोई भरोसा नहीं है।ऐसे स्कूल के प्रधान पाठक व शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है कि वे विद्यार्थियों को कहा बैठाएं।स्कूल के प्रभारी प्रधान पाठक रविशंकर सनोडिया ने बताया कि स्कूल भवन 1987 में बना था। करीब 25 साल बाद भवन की हालत जर्जर हो गई है।5 कमरों के स्कूल भवन में बच्चों की दर्ज संख्या 32 है। कक्षा पहली से पांचवी तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए तीन कमरों में पढ़ाई की जाती है लेकिन दो कमरे अत्यधिक जर्जर हो गए हैं, तथा तीसरा कमरा भी जर्जर स्थिति में है। भवन की जर्जरता को देखते हुए अब आंगनबाड़ी भवन में बच्चों को पढ़ाई जाने की विचार किया जा रहा है।

दोपहर में बंद हुए भीमगढ़ बांध के गेटः लगातार हो रही वर्षा के कारण बैनगंगा नदी पर बने संजय सरोवर भीमगढ़ बांध से चार गेट खोलकर 30 हजार घन फिट (क्यूसेक) पानी रविवार शाम 7 बजे से छोड़ा जा रहा था।मंगलवार को वर्षा थमने के बाद बांध के चारों गेट बंद कर दिए गए हैं।सहायक यंत्री यूबी मर्सकोले ने बताया कि, बांध का जल स्तर 517 मीटर पर आने के बाद दोपहर करीब 3 बजे बांध के सभी गेट बंद कर दिए गए हैं।

उफान पर नदी, जोखिम में जानः लगातार वर्षा के कारण बैनगंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया है।इससे पलारी-कुडारी गांव के बीच देवघाट का पुराना रपटा उफान पर चल रहा है।इसके कारण पलारी से सीधे कुडारी व भीमगढ़ का संपर्क टूट गया है।लगातार वर्षा से शेढ़ नदी उफान पर है।बाढ़ का पानी पुल के कई फिट ऊपर से बह रहा है। इसके बावजूद खूबी-जमकोना रपटे को ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पार कर रहे है।लखनादौन-नरसिंहपुर एनएच 44 से महज 4 किमी दूर खूबी-जमकोना गांव में उफनाती नदी के रपटे को पार करते अनेक ग्रामीण दिखाई दिए।

24 घंटे में घंसौर में 5 इंच वर्षाः जिले में सभी विकासखंड क्षेत्रों में रूक-रूककर वर्षा का दौर जारी है। बीते 24 घंटे में आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखंड में 132 मिमी (5 इंच से ज्यादा) वर्षा रिकार्ड की गई है।वहीं सिवनी शहर व आसपास के क्षेत्रों में 29.8 मिमी, बरघाट में 21, केवलारी में 44, कुरई में 25, लखनादौन में 52.3, धनौरा में 80.2, छपारा में 48 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई है।वहीं जिले के आठ विकासखंडों में 1 जून से 16 अगस्त तक जिले में 8129.1 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई है। जबकि पिछले साल 16 अगस्त 3861.3 मिमी वर्षा जिले में दर्ज की गई थी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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