सिवनी,नईदुनिया प्रतिनिधि। तहसील में पदस्थ लिपिक (नायब नाजिर) सचिन दहायत को राहत राशि का भुगतान किन खातों में जमा कराना है, इसकी जानकारी उपलब्ध कराने व खातों में जमा राशि को निकलवाकर अपना कमीशन लेने के बाद वापस लिपिक तक पहुंचाने वाले बिचौलियों के तौर पर काम करने वाले दो चचेरे भाइयों को केवलारी पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपितों में श्रेष्ठ अवधिया एक निजी बैंक का कर्मचारी बताया जा रहा था जबकि विशेष अवधिया भी उसके साथ काम करता था। सूत्रों के मुताबिक, 11.16 करोड़ रुपये का घोटाला करने वाले फरार लिपिक सचिन दहायत से दोनों आरोपितों की गहरी दोस्ती थी। गिरफ्तार चचेरे भाइयों को पुलिस ने सिवनी न्यायालय में पेश कर दिया है। न्यायालय ने दोनों को 25 नवंबर तक पुलिस रिमांड में भेजा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपितों से प्रकरण में मामले में आगे की पूछताछ की जा रही है। वहीं रविवार को पुलिस ने राजस्व अधिकारियों के साथ आरोपितों के घर पहुंचकर घर में मौजूद चल-अचल संपत्ति की सूची तैयार करने के साथ ही आरोपितों के बैंक खातों की जानकारी एकत्रित की है।

निजी खातों में जमा कराया लाखों का कमीशन : प्रारंभिक जांच घोटाले के 40 बैंक खातों के अलावा दोनों आरोपितों के 4 से पांच निजी बैंक खातों की जानकारी पुलिस को मिली है, जो अलग-अलग बैंकों में संचालित है। इन बैंक खातों में जमा राशि को खंगाला जा रहा है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इन बैंक खातों में कितना लेनदेन किया गया है। सूत्रों के मुताबिक फर्जीवाड़े में बचने वाली कमीशन की राशि दोनों चचेरे भाई इन्हीं निजी बैंक खातों में जमा कराते थे। हालाकि बैंक खातों में ज्यादा नकदी जमा नहीं है।अधिकांश राशि दोनों विभिन्ना लेनदेन में खर्च हो चुकी है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी हुई है कि आरोपितों ने घोटाले की राशि से कौन-कौन से चल-अचल संपत्ति बनाई है, ताकि न्यायालय में इसकी जानकारी पेश कर उस पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

घर में नहीं मिले गहने, परिवार लापता : छानबीन के दौरान पुलिस को चचेरे भाईयों के घर में कीमती सोने-चांदे के जेवर नहीं मिले हैं। हालांकि घर में विलासिता से जुड़ी कई महंगे उपकरण जैसे टीवी, फ्रिट, एसी व अन्य सामग्री मिली है। पुश्तेनी मकान में आरोपित रहते है, जो उनके दादा के नाम पर दर्ज है। 1800 वर्गफिट के घर में आरोपितों ने नया निर्माण भी कराया है, जिसका मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी विभाग को सौंपी गई है। कार्रवाई के दौरान घर में परिवार के लोग नहीं मिले।

नहीं पड़ी किसी की नजर, होता रहा फर्जीवाड़ा : अगस्त 2022 में भीषण बाढ़ के कारण केवलारी और छपारा भीमगढ़ में लोगों को भयानक त्रासदी का सामना करना पड़ा था। इस दौरान बड़ी संख्या में राहत राशि के प्रकरण भी तैयार किए गए थे। वहीं कोरोना महामारी में कार्यालय भी महीनों तक बंद रहे थे।इसी बीच केवलारी तहसील में पदस्थ लिपिक सचिन दहायत ने राहत राशि में फर्जीवाड़ा का खेल शुरू किया। सूत्रों के मुताबिक, लिपिक ने राहत राशि के तौर पर मिलने वाले लाखों रुपये का गबन करने पहले परिवार के लोगों के बैंक खातों में घोटाले की राशि जमा कराई। जब सभी परिचितों के बैंक खाते नहीं बचे तो, तो दोस्तों श्रेष्ठ अवधिया व विशेष अवधिया की मदद से विभिन्ना लोगों के बैंक खाते लेकर इसमें राहत राशि जमा कराई गई।यही लोग संबंधितों से राशि वापस लेकर लिपिक तक पहुंचाते थे।हालाकि इसमें आरोपितों का कितना कमीशन होता था यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।

जांच पूरी होने में लगेंगे कई हफ्ते : जिस रफ्तार से पुलिस प्रकरण में जांच व कार्रवाई कर रही है उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि 11.16 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच पूरी होने में कई हफ्ते लग जाएंगे। बैंकिंग ट्रांजेक्शन से जुड़ी जानकारी को बारिकी से खंगालने के साथ सभी लोगों से पूछताछ करने पुलिस को काफी समय लग रहा है। क्षेत्रीय केवलारी विधायक राकेश पाल भी इस घोटाले पर उच्च स्तरीय जांच की मांग उठा चुके हैं। लोगों का कहना है कि, पुलिस को जांच की रफ्तार और दायरा बढ़ाना होगा, ताकि जल्द से जल्द आरोपितों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जा सके। वहीं कोषालय से किए गए भुगतानों की जांच किस स्तर पर पहुंची है, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी बिन्दुओं पर एक साथ जांच करना संभव: नहीं है। एक-एक बिन्दु पर सिलसिलेवार छानबीन व तफ्तीश की जा रही है।जांच पूरी होने समय लगना स्वभाविक है।

इनका कहना है

घोटाले का प्रकरण बड़ा है। जिन-जिन बैंक खातों में लेनदेन किया गया है, उनके सैकड़ों पेज के बैंक स्टेटमेंट की बारीकी से छानबीन करने साथ ही सभी तथ्य जुटाने में समय लगना स्वभाविक है। सभी बिन्दुओं पर एक साथ जांच करना संभव नहीं है। जिन बैंक खातों में लेनदेन किया गया है, उनकी जांच की जा रही है। इसके बाद भुगतान में कोषालय की भूमिका पर भी जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।- भगत सिंह गठोरिया, एसडीओपी केवलारी

इनका कहना है

राहत राशि का फर्जी भुगतान कराने बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले दो आरोपितों को पुलिस ने सोमवार को सिवनी न्यायालय में पेश कर दिया है। न्यायालय ने 25 नवंबर तक दोनों पर पुलिस रिमांड दी है। मामले में आगे की पूछताछ की जा रही है। दोनों आरोपितों के घर पहुंचकर छानबीन कर चल-अचल संपत्ति की सूची तैयार की गई है।

-किशोर बामनकर, थाना प्रभारी केवलारी।

Posted By: Jitendra Richhariya

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