शहडोल। मानसून की लेटलतीफी के चलते पूरे संभाग में खरीफ की फसल की बोवनी पिछड़ गई है। स्थिति यह है कि अभी तक मात्र पांच प्रतिशत भूमि में ही बीज पड़ा है। अबारिश की स्थिति से खरीफ की फसल को बोवनी के समय में ही तीस प्रतिशत से अधिक का नुकसान उठाना पड़ सकता है। कृषि विभाग का मानना है कि अभी एक सप्ताह और मानसून नहीं आया तो फसल की बोवनी में देरी होगी और किसानों के चेहरों पर मायूसी छा जाएगी।

यह है अब तक की जानकारी

कृषि विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक शहडोल जिले में 30 जून तक तीन प्रतिशत भूमि में बोवनी हो पाई है। अनूपपुर जिले में 10 प्रतिशत तथा उमरिया जिले में तो बोवनी शुरू ही नहीं हो पाई है। पूरे संभाग में इस बार 30 जून तक खरीफ फसल की बोवनी मात्र 5 प्रतिशत ही हो पाई है।

उर्बरक तक नहीं उठाया

किसानों ने बोवनी न हो पाने के कारण अब तक खाद तक नहीं उठाया है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक यहां के किसान यूरिया, सुपर फास्फेट, पोटाश व डीएपी का उपयोग करते हैं। संभाग में किसानों के लिए 11238.4 मीट्रिक टन खाद का भंडारण किया गया है। जिसमें से अभी तक सिर्फ 1767.3 मीट्रिक टन खाद का ही वितरण हो पाया है। किसान उर्बरक लेने आ ही नहीं आ रहे हैं। जब तक बोवनी नहीं होती तब तक खाद के वितरण की ढीली स्थिति ही रहने की बात कही गई है।

चिंता की लकीर

जून माह में बरसात न होने से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं। इस संबंध में संयुक्त संचालक कृषि आरएस चर्मकार का कहना है कि बरसात न होने से किसानों को चिंतित होना स्वाभाविक है। पिछले वर्ष अब तक 90 प्रतिशत बोवनी हो चुकी थी। सब कुछ बारिश पर ही निर्भर है।