शहडोल(नईदुनिया प्रतिनिधि)। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर शरणजीत सिंह बघेल के पांडवनगर स्थित आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान कवियों ने देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं का पाठ किया और सामायिक रचनाएं पढ़ीं।वरिष्ठ और युवा कवियों ने इस कार्यक्रम में अपनी सहभागिता निभाई। संचालन नत्थू लाल गुप्ता ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत अंजलि नैना सिंह बघेल द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई ।

तत्पश्चात वरिष्ठ साहित्यकार अवधप्रताप शरण ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुंदर कविता पढ़ी-बरस बाद बरस रहे मेघ सांवरे ऐसे बारिश का स्वागत किया।वरिष्ठ कवयित्री उमा सिंह ने नव विहान की स्वर्णिम किरणें कविता गाकर सबका मन मोहा।

बघेली रचनाओं को किया गया पाठ : वरिष्ठ बघेली कवि रामसखा नामदेव ने आजादी के दुल्हिंन के सेंदुर का अमर बनाई से वातावरण को भाव विभोर कर दिया ।बघेली के ही उम्दा कवि शिवपाल तिवारी ने रक्षाबंधन परब मा भाई लीन्हिस छान कविता का पाठ किया एवम त्यौहार में भी मदिरापान से उत्पन्ना विभीषिका से समाज को अवगत कराया ।गीतकार नत्थू लाल गुप्ता ने कविता पढ़ी कि हमे गर्व है कि हम भारत माता की संतान हैं इस गीत को सुर और लय में प्रस्तुत कर देश प्रेम की भावना का रंग जमा दिया।

देशप्रेम के भी गूंजे तराने : कवयित्री जनक कुमारी सिंह ने देश भक्ति से ओतप्रोत कविता से वातावरण में उमंग भर दिया।कवि मिथिलेश राय ने हम सब की आवाज में तेरी ही मिट्टी हो गीत प्रस्तुत किया। हास्य कवि आरसी गुप्ता ने कविता से नेता जी के जमीन से जुड़े होने की बात की। कवयित्री किरण सिंह बघेल शिल्पी ने देशवासियों का आह्वान करते हुए पुराने समय की सादगी को फिर से जीवन में उतारने के लिए अलख जगाते हुए कहा-साइकिल का जमाना हो, मिलना और मिलाना हो,पहचानें पड़ोसी को न गुरुर न ताना हो।कवि अशोक त्रिपाठी माधव,युवा कवि नवनीत शर्मा,सुश्री शैलजा तिवारी,शिवनारायण त्रिपाठी ने भी कविता पाठ किया।कार्यक्रम के अंत में कवि गोविंद प्रसाद श्रीवास्तव हंस को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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हमारे जीवन में कर्मों का ही महत्व होता है

पारस विद्या भवन में आयोजित धार्मिक सभा में प्रवचन में जैन मुनि सुव्रत सागर ने कहा-

फोटो 06 प्रवचन देते हुए जैन मुनि सुव्रत सागर।

शहडोल(नईदुनिया प्रतिनिधि)। दुनिया में धार्मिक क्षेत्र में यदि देखा जाए तो सबसे बड़ा कौन होता है। इस विषय पर विचार करते हुए मुनि सुव्रत सागर जी महाराज ने पारस विद्या भवन में आयोजित धार्मिक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम अपने सारे काम अपने कल्याण करने के लिए किया करते हैं, यदि हम सारे काम करते हुए भगवान को भूल जाते हैं तो हमारा बहुत बड़ा दुर्भाग्य है। इन्होंने कहा कि हमारा जीवन शुरू से ही भगवान की कृपा से प्राप्त हुआ है, तथापि हम अपने कर्म की व्यवस्था को भगवान की माना करते हैं अतः हमारे जन्म में हमारे कर्म रूपी भगवान का हाथ जरूर होता है। जैनमुनि ने कहा कि हम अपने जीवन में कुछ भी करें किंतु भगवान को नहीं भूलना चाहिए। जो भगवान को भूलकर भगवान को छोड़ देता है उसको पग पग पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

मुनिश्री ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान सबसे बड़े होते हैं और जो व्यक्ति अपने आप को बड़ा मानता है वह कभी भगवान की भक्ति नहीं कर सकता। भगवान की भक्ति करने वाला यह बताता है कि मैं अपने आप को छोटा मानता हूं और भगवान को बड़ा मानता हूं। अगर हमें भगवान से प्रेम हो जाएगा तो हम भगवान के बिना रह नहीं पाएंगे और भगवान के बिना नहीं रह पाने के कारण हम भगवान की भक्ति करेंगे। भगवान तो हमसे बहुत प्रेम करते हैं किंतु हम भगवान से प्रेम नहीं करते। अगर एकतरफा प्रेम होगा तो कब तक चलेगा। इसलिए इतना भगवान हम से प्रेम करते हैं उतना ही हमें भगवान से प्रेम करना चाहिए।

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