शहडोल।

विराटनगरी की महिमा निराली है। यहां जहां पर पांडवों ने अपना अज्ञातवास का समय काटा तो वहीं भगवान शिव की भी यह नगरी रही है। यहां के कल्चुरीकालीन बूढ़ी माता मंदिर परिसर में ही शिव का गुफा मंदिर है। यह मंदिर तकरीबन 1200 साल पुराना है और कई रहस्य अपने अंदर यह मंदिर छिपाए हुए है। किसी जमाने में इस मंदिर के अंदर शेर अपना आसन जमाकर बैठा करते थे और यह जगह पूरी तरह सुनसान थी। धीरे धीरे अब यह मंदिर शहर के अंदर ही आ गया है और अब यहां सावन के महीने में भोलेनाथ की पूजा अर्चना करने वालों का तांता लगता है। नागदेवता आज भी यहां शिवलिंग पर लिपटे हुए नजर आते हैं।

मंदिर का इतिहास एक नजर में: सावन का पहला सोमवार आज है। यहां के कल्चुरीकालीन बूढ़ी माता मंदिर परिसर में स्थित शिव गुफा मंदिर जो 1200 साल पुराना है आज यहां पर भोलेनाथ का जलाभिषेक होगा। इस गुफा मंदिर का पुराणों में वर्णन मिलता है। शहडोल शहर से दो किलोमीटर की दूरी पर उमरिया जिले की सीमा में स्थित यह गुफा मंदिर बेहद रहस्यमयी है। आज भी यह शिव मंदिर अपने वैभव के लिए जाना जाता है। यहां जिसने भी एक बार पूरी श्रद्धा के साथ जलाभिषेक पूजन कर जो भी कामना की उसकी वह कामना पूरी ही होना है। सावन के सोमवार में यहां अनुष्ठान करने का एक विशेष महत्व है।

बूढ़ी माता मंदिर के पंडा राजेश कचेर ने नईदुनिया को बताया कि यह मंदिर अति प्राचीन है। इसे कल्चुरी काल से जोड़कर देखा जाता है। इस विराट नगर में आज भी उस समय के कुछ मंदिर बने हुए हैं जिस समय यह मंदिर यहां स्थापित्य हुआ था। पंडा ने बताया कि गुंबज का निर्माण भक्तों ने कराया है यह जीर्ण शीर्ण हो गया था। इस शिवलिंग का वर्णन पुराणों में है और किसी जमाने में यहां शेर और बाघ डेरा लगाकर बैठे नजर आते थे।