शहडोल। जब हम अपने घर के आंगन की तुलसी को ठीक से महत्व नहीं दे सकते तो फिर घर के बाहर लगे पीपल को कितना महत्व देते होंगे। यह बात शहीद देवेंद्र सोनी की तीन साल से लगी प्रतिमा को अब तक न बदलने को लेकर चरितार्थ हो रही है। जो प्रतिमा शहीद पार्क में लगाई गई है उसे देखकर कोई भी कह सकता है कि यह देवेंद्र सोनी की शक्ल से जरा भी मेल नहीं खा रही है। इस प्रतिमा को बदलवाने के लिए स्वजनों के साथ साथ शहर के जागरूक लोगों ने आवाज उठाई है लेकिन आज तक यह प्रतिमा जस की तस स्थिति में खड़ी है।

हम भूल नहीं सकते हैं देवेंद्र की शहादतः वह दिन 25 जनवरी 2017 का है जब जम्मू कश्मीर के गुरेज सेक्टर में लगभग माइनस 35 डिग्री से नीचे के तापमान में रहकर देश की रक्षा कर रहे 15 जवान बर्फ से दब गए थे। उनको निकालते वक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान शहडोल के जावांज जवान देवेंद्र सोनी शहीद हो गए थे। इनकी शहादत विराट भूमि के लिए अमर हो गई है। इस शहीद की प्रतिमा को आनन फानन में श्रेय लेने के उद्देश्य से आपत्तिजनक स्थिति में शहीद पार्क में स्थापित करा दिया गया। यह प्रतिमा कहीं से नहीं लगती है कि यह शहीद देवेंद्र सोनी की प्रतिमा है। आपत्ति करने के बाद भी आज तक यह प्रतिमा नहीं बदली जा सकी है।

लगातार उपेक्षा आखिर कौन जिम्मेदार : शहीद देवेंद्र सोनी की दूसरी प्रतिमा स्थापित कराने को लेकर शहर के लोग कई बार आवाज उठा चुके हैं। शहर के अंदर सड़कें बनती हैं मॉडल रोड बनते हैं, तालाब का सौंदर्यीकरण होता पर शहीद का सम्मान स्थापित करने की चिंता न नगर प्रशासन को है न जिला प्रशासन को। आखिर शहीद के सम्मान की रक्षा कौन करेगा और लगातार हो रही उपेक्षा को जिम्मेदार कौन है।

शहीद के नाम पर चौराहा तक नहीं बन सकाः देखा जाता है कि जब किसी शहर को कोई जवान शहीद होता है तो उसके सम्मान में शहर के पार्क, स्टेडियम, सड़क और चौराहे का नाम रख दिया जाता है पर शहडोल के इस सपूत के नाम से एक चौराहा तक नहीं है। आखिर इस तरह की स्थिति कब तक रहेगी। जिस वार्ड में शहीद के माता पिता रहते हैं उस वार्ड के पार्षद कई बार नपाध्यक्ष को प्रतिमा बदलवाने कह चुके हैं स्वजन अपने पास से कुछ राशि खर्च करने को तैयार हैं पर यह प्रतिमा अब तक नहीं बदली जा रही है।

क्या कहते हैं लोग

- समाज सेवी राजेश्वर उदानिया का कहना है कि शहीद का पूरा सम्मान होना चाहिए।

- युवा उद्यमी मनोज गुप्ता का कहना है कि देवेंद्र सोनी हमारे शहर की पहचान हैं गौरव हैं।

- छात्र नेता आकृति सिंह का कहना है कि प्रतिमा को बदलने में वक्त क्यों लग रहा है।

- युवा समाजसेवी शिल्लू रजक का कहना है कि शहीद की उपेक्षा नहीं होना चाहिए।

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हम शहीद का सम्मान करते हैं। हमने प्रतिमा लगवा दी है अब यदि लगता है प्रतिमा ठीक नहीं है तो शहीद के स्वजन पैसा लगाएं। हां इतना जरूर है कि शहीद पार्क को विकसित किया जाना है।

उर्मिला कटारे

नगरपालिका अध्यक्ष शहडोल।

Posted By: Nai Dunia News Network

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