शहडोल, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिला मुख्यालय से लगे हुई उमरिया जिले की सीमा पर स्थित है बूढ़ी माता मंदिर। यह मंदिर कल्चुरी काल है और यहां के प्रति लोगों की अगाध आस्था है। शारदेय नवरात्र के दिनों में यहां पर अब तक बीस हजार से अधिक लोग दर्शन करने पहुंचे हैं और नवमीं के दिन यहां अठवाईं चढ़ाने वालों की भीड़ उमड़ती है। यह मंदिर दूर-दूर तक अपनी ख्याति प्राप्त किए हुए है। कलचुरी कालीन यह मंदिर अद्भुत है और नवरात्र में तो यहां भक्तों का तांता लगा ही रहता है। कहा जाता है कि कभी पांडव भी इस मंदिर में पूजा अर्चना किया करते थे।

यहां जो आता है होती है इच्छा पूरी

कहा जाता है कि बूढ़ी माता मंदिर में मां की प्रतिमा स्वयं की प्रकट हुई है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना गया है। इस मंदिर के चमत्कार और कई कहानियां दूर.दूर तक फैली हुई हैं। लोगों की आस्था इस मंदिर से काफी जुड़ी हुई है यही कारण है कि नवरात्र पर्व के बाद भी साल भर लोग यहां पहुंचते हैं। यहां जो भी इच्छा की जाती है वह पूरी होती है।इस मंदिर के आसपास कभी घनघोर जंगल हुआ करता था जंगली पशु यहां अक्सर घूमते रहते थे। किवदंती है कि किसी निराश और दुखी व्यक्ति को मातारानी ने बूढ़ी मां के रूप में यहां दर्शन दिए थे, तब से यह मंदिर इसी नाम से प्रसिद्ध है।

नवमी को बांधते हैं यहां नारियल

नवमी के दिन लोग यहां आकर अपनी मनोकामना मांगकर नारियल बांधते हैं। जब मनोकामना पूरी हो जाती है तक भक्त यहां आकर उस नारियल को खोलता है और इसे अर्पित करता है। पुजारी का कहना है कि साल भर यहां पर धार्मिक कार्यक्रम पूजा पाठ होता रहता है। नवरात्र पर्व पर यहां भक्तों की भीड़ ज्यादा रहती है। इनका कहना है कि सप्तमी अष्टमी और नवमी को लोग विशेषकर पूजा करने आते हैं।

दुर्गा मंदिर में आज रात नौ बजे महाआरती

विराटेश्वरी मंदिर के पुजारी आशीषराज तिवारी ने बताया है कि मंदिर में नवमी को रात नौ बजे महाआरती होगी। दसवीं को मंदिर परिसर में भंडारा होगा और एकादशी को जवारा विसर्जन व महाकाली खप्पर यात्रा निकाली जाएगी। मोहनराम तालाब में जवारा विसर्जन होगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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