शहडोल। हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा फाउंडेशन के तत्वावधान में प्रकृति संरक्षण को लेकर 30 अगस्त रविवार को पूरे देश में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन राव भागवत में अपने विचार व्यक्त किए ऑनलाइन बौद्धिक देते हुए सरसंघचालक ने कहा कि प्रकृति मनुष्य के उपभोग के लिए है ऐसा मानकर आज जो लोग काम कर रहे हैं उससे दुष्परिणाम और भयावहता सामने आ रही है। इसलिए मनुष्य को विचार करना चाहिए कि हमारा तरीका ऐसा नहीं है।

सरसंघचालक ने कहा कि हम भी प्रकृति के अंग हैं यह बात समझना होगा। उन्होंने कहा कि पेड़ों में भी जीवन है हमारे पास यह ज्ञान हजारों साल पहले से था एक सामान्य सा अनपढ़ आदमी भी जानता है कि शाम को पेड़ों को नहीं छेड़ना चाहिए। सरसंघचालक ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा पर्यावरण के प्रति हम जो तरीका अपनाते हैं वह अनुकूल नहीं है उन्होंने आगे कहा कि पिछले 300 सालों में हम प्रकृति के संरक्षण को लेकर भटक गए हैं।

सरसंघचालक ने अपने उद्बोधन में भारत सहित 10 देशों के लोगों को ऑनलाइन संदेश देते हुए आह्वान किया है कि हम प्रकृति का वंदन करें हम प्रकृति के संरक्षण के लिए आगे आएं और प्रकृति के बगैर हमारे जीवन सुख में नहीं आ सकता है यह सोच अपने मन में धारण करें। उन्होंने यह भी आव्हान किया कि हम धरती को हरा-भरा करने के लिए जो भी कर सकते हैं वह करें । गौरतलब है कि हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा फाउंडेशन के द्वारा यह कार्यक्रम पहली बार आयोजित किया गया है । भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कार्यक्रम को लेकर फाउंडेशन को शुभकामनाएं दी उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रकृति के साथ तालमेल बैठाना हमारा नैतिक कर्तव्य है आने वाली पीढ़ियों को बेहतर धरती मिले इस बात का सबको प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने संगठन को अपनी ओर से बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा है कि हमें मां की तरह प्रकृति ने पाला पोषा है हमने दोहन की जगह उसका शोषण किया है। यह कार्यक्रम पूरे भारतवर्ष में ऑनलाइन आयोजित किया गया है और कार्यक्रम के बाद लोगों ने अपने अपने घरों में प्रकृति वंदन कार्यक्रम के तहत गमले में लगे तुलसी के पौधे सहित अन्य पौधों का पूजन भी किया है और प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लिया है।

Posted By: Prashant Pandey

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