शहडोल। (नईदुनिया प्रतिनिधि) तीन दिन से मौसम बेईमान है और आसमान से आफत बरसा रहा है सोमवार को थोड़ी राहत रही कि न तो बारिश हुई और ना ही ओला गिरे लेकिन शहडोल जिले के बार्डर में यानि अमलाई में जरूर शाम पांच बजे हल्की बारिश हुई और ओला भी गिरा। पिछले तीन दिनों से जिस तरह के हालात हैं उससे लग रहा है कि किसानों का भारी नुकसान हुआ है और इसका आंकलन करना जरूरी है। सर्वे करने के लिए अपने अपने हल्के में पटवारी पहुंचने लगे हैं और अपने स्तर पर खेतों में जाकर किसानों से बात कर अब तक की स्थिति का आंकलन कर रहे हैं। किसानों को अब लगने लगा है कि वे बरबाद हो गए हैं और राहत के लिए अब भगवान और सरकार दोनों की ओर उनकी नजर है।

ब्यौहारी में हुई जमकर हानि

ब्यौहारी क्षेत्र में ओलावृष्टि के कारण जमकर हानि हुई है। यहां के सभी हल्कों में पटवारी जाकर सर्वे करना शुरू कर दिए हैं। यहां के किसानों ने बताया कि रविवार को उनके खेतों में ओला वृष्टि हुई है जिससे फसल को भारी नुकसान हुआ है। पटवारियों ने अपनी रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर दी है। इसी तरह जैतपुर जयसिंहनगर, बुढ़ार, धनपुरी, बंगवार सहित सभी उन क्षेत्रों में जहां जहां फसल को नुकसान समझ में आ रहा है वहां सर्वे का काम पटवारियों ने अपने अपने स्तर पर शुरू कर दिया है।

बिछ गई खेत में चने की फसलः मिठौरी गांव के किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि तेज बारिश व ओलावृष्टि से चने की फसल खेत में बिछ गई है और फसल को भारी नुकसान होने का अंदेशा है। सुरेंद्र सिंह का कहना है कि चने के अलावा अरहर, मसूर और अलसी की फसल भी नष्ट हो गई है। इनका कहना था कि अभी तक उनके क्षेत्र में प्रशासन को कोई कर्मचारी या अधिकारी फसल के नुकसान का आंकलन करने नहीं आया है। सबसे ज्यादा नुकसान मुनगा की फसल को हुआ है सारे फूल झड़ गए हैं और अब फल की कम उम्मीद है।

जैतपुर में लिखवा रहे नहीं हुआ नुकसानः जैतपुर क्षेत्र में भी भारी बारिश व ओलावृष्टि से किसानों को नुकसान हुआ है लेकिन कुछ पटवारी इन किसानों से यह लिखवा रहे हैं कि उनको कोई ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। यहां पटवारी किसानों को जाकर समझा रहे हैं कि मौसम खुलेगा तो सब ठीक हो जाएगा और कागज पर यह लिखवाकर दस्तखत करा रहे हैं कि फसल व पशु किसी की हानि नहीं हुई सबकुछ ओके है।

रसमोहनी समिति में भीग रही धानः रसमोहनी समिति के बाहर रखी छह हजार क्विंटल धान जो खुले में रखी है इस बारिश के कारण पूरी तरह से भीग गई है। इसे किसी तरह पॉलीथिन व पन्नी से ढककर बचाने की कोशिश की जा रही है। धान पूरी तरह से गीली हो गई है। इसका उठाव नहीं किया जा रहा है। पंद्रह दिन पहले इस धान का उठाव कराने के लिए लैम्प्स प्रबंधन को आदेशित किया गया था लेकिन इसका उठाव नहीं किया गया है जिसके चलते यह धान बरबाद हो रही है। इस ओर अधिकारी जरा सा भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network