शहडोल(नईदुनिया प्रतिनिधि)।

कोरोना संकटकाल में शहर के घरौला मोहल्ला में रहने वाली एकता एवं आस्था बर्मन ने अपने पिता को खोया। इनके पिता की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। मां पहले ही दुनिया से चल बसी थी। पिता की मौत के बाद दोनों बेटियां अकेली रह गई हैं । शासन और प्रशासन ने इनकी मदद तो की लेकिन अपनों ने उनसे किनारा कर लिया है । जब कभी इन बेटियों को अपने माता पिता की याद आती है तो घर में चुपके से रो भी लेती हैं और एक दूसरे को सांत्वना भी दे लेती हैं।

पेंशन की मदद से चल रही जिंदगीः शहडोल मुख्यालय के घरौला मौहल्ला में रहने वाले राम सजीवन बर्मन 3 मई 2021 को इस दुनिया से अलविदा कह गए थे और उनकी पत्नी 12 साल पहले किसी बीमारी के कारण इस दुनिया से चली गई थी। अब इनकी दो बेटियां एकता और आस्था पिछले महीने शुरू हुई पेंशन के सहारे जिंदगी की गाड़ी चला रही हैं। जब एकता के पिता की मौत हुई तो मोहल्ले और शहर के लोगों ने काफी मदद की। कुछ जनप्रतिनिधियों ने भी आगे आकर मदद की और इनकी पेंशन चालू करवा दी। जून महीने से आस्था के खाते में 5000 रुपये पेंशन के रूप में आना शुरू भी हो गए हैं।

एकता ने किया था दाह संस्कार पिता का अंतिम संस्कार बड़ी बेटी एकता ने किया था उस समय जिसने भी देखा सुना उसकी आंखें भर आईं थी। एकता ने बताया कि ऐसी विकट परिस्थिति में जहां सभी ने आकर हमारा हाल जाना तो वहीं क्षेत्र के विधायक जयसिंह मरावी और नगर की प्रथम महिला उर्मिला कटारे ने अब तक मेरे घर आकर मुझसे बात नहीं की।

पैसे मिले तो अपने कर लिए किनारा

इन बेटियों का कहना है कि पैसे से मदद होती देख घर के लोगों ने अब किनारा कर लिया है। एकता बताती है कि मौसी और उनके बेटे बहू के जरूर फोन आते हैं और हालचाल ले लेती हैं लेकिन हमारी किस तरह से गुजर बसर हो रही है इसकी चिंता अब परिवार के दूसरे लोग नहीं कर रहे। एकता ने बताया कि यह तो अच्छा था कि पिता के समय ही प्रधानमंत्री आवास बन गया था वरना टूटे-फूटे मकान में रहने की नौबत आ जाती ।

घर में नल व शौचालय की हो गई सुविधा

नगर पालिका सीएमओ ने घर के अंदर नल लगवा दिया और टंकी रखवा दी जिससे पानी की दिक्कत दूर हुई है। वहीं शौचालय पहले ही बन गया था। एकता ने ग्रेजुएशन कर लिया है और अब वह चाहती है कि कहीं जॉब मिल जाए जिससे सम्मान के साथ आगे की जिंदगी जी सके। एकता की छोटी बहन आस्था ने बताया कि मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना के माध्यम से उनके खाते में जून माह से 5 हजार रुपये महीना आना शुरू हो गया है और राशन के नाम पर 15 किलो अनाज और नमक मिल जाता है।

शहडोल जिले में सात बालक- बालिकाएं चि-तिः शहडोल जिले में आपदा से अपने माता पितो को खोने वालों में अंकित कहार 14 वर्ष निवासी वार्ड नं 5 ब्यौहारी, मीनाक्षी गोंड 2 वर्ष निवासी ग्राम नदना, आस्था वर्मन 17 निवासी घरौला मोहल्ला शहडोल, कुमारी वैष्णवी गुप्ता वार्ड नं.11 ब्यौहारी, शिवानी गुप्ता 15 वर्ष निवासी ग्राम अमझोर, कुमारी सुलक्षणा यादव 11 वर्ष एवं प्रिंस यादव 15 वर्ष एफसीआई गोदाम के पास शहडोल ने कोरोना के दौरान अपने पालकों को खो दिया है। अब इनकी देखभाल सिर्फ सरकार के भरोसे है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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