शहडोल(नईदुनिया प्रतिनिधि)।

प्रताड़ित महिलाओं को एक छत के नीचे सहारा मिला, उनको काउंसलिंग दी गई और जब तक रहीं उनको भरपेट भोजन भी दिया गया इसके बाद कोशिश की गई कि उनका घर बसा रहे। हम बात कर रहे हैं जिला मुख्यालय के वन स्टॉप सेंटर (सखी) की जहां पर बीते एक साल में 200 केस आए जिसमें महिलाओं ने अपने आपको बेहद लाचार बताया इन महिलाओं के परिवार वालों को बुलाकर समझाया गया जिसमें से कई मामले निपट भी गए और घर टूटने से बच गए। 45 महिलाओं को सहारा देकर उनको बेहद सलीके से सम्मान के साथ घर पहुंचाया गया।

इस तरह के केस आते हैं सखी के पासः इस तरह की महिलाएं और किशोरियां यहां आश्रय लेने पहुंचती हैं या कि पुलिस द्वारा लाई जाती हैं जो किसी न किसी तरह से घरेलू हिंसा का शिकार होकर पहुंचती हैं। कई बार तो ऐसे भी मामले आते हैं कि लड़का लड़की बालिग हैं और उन्होंने भागकर शादी कर ली जिसके बाद लड़की या लड़के पक्ष के लोग इनको अपनाने के लिए तैयार नहीं होते हैं मारपीट करते हैें इसके बाद जब मामला यहां तक पहुंचता है तो सखी यानी वन स्टॉप सेंटर में दोनों पक्ष बुलाकर घर बसाने की कोशिश की जाती है।

365 दिन में 200 केस पहुंचेः वन स्टॉप सेंटर में जून 2020 से जून 2021 तक 200 केस पहुंचे। इनमें 45 महिलाओं को आश्रय देकर उनको काउंसलिंग कर घर पहुंचाया गया। तकरीबन 14 मामले कोर्ट में अभी पेंडिंग हैं। सखी की संचालिका के मुताबिक यहां पर बेहद गंभीर किस्म के मामले भी आते हैं जिनको किसी न किसी तरह समझाकर शांत किया जाता है। इसमें कभी कभी महिलाओं की भी गलती सामने आती है पर जब काउंसलिंग की जाती है तो ये मान जाती हैं और फिर पति के साथ वापस घर चली जाती हैं।

प्यार करने वालों को भी मिला संरक्षणः वन स्टॉप सेंटर में बुढ़ार का एक मामला प्रेम विवाह से संबंधित पहुंचा। यहां पर जब महिला आई तो उसने बताया कि उसने हिंदू लड़के से शादी कर ली जिसके बाद मेरे भाईयों ने पति को जमकर पीटा। इस महिला को सात दिनों तक सखी सेंटर में र खा गया इसके बाद लड़के के मां बाप को बुलाया और बात की गई इन लोगों ने लड़की को बहू बनाकर अपनाया और घर लेकर चले गए वहीं पुलिस ने मारपीट करने वाले लड़की के भाईयों को हवालात की हवा खिलाई। जैतपुर कोर्ट में लड़का लड़की शादी कर अनूपपुर चले गए थे जहां पर लड़की के भाईयों ने इस महिला के पति के साथ मारपीट की थी।

पति ने आग से जलाकर दी प्रताड़नाः यहां एक पर एक महिला पहुंची थी जिसने बताया कि उसके पति ने उसे जलाकर मार डालने की कोशिश की। पति दहेज की मांग करते हुए मारपीट करता था। पहले पति से तलाक होने के बाद दूसरे पति ने प्रेम की जगह नफरत दी। डेढ़ साल में ही दूसरे पति ने प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। यह महिला 29 जून को खुद से वन स्टॉप सेंटर पहुंची। इस महिला के पति को आश्रय देकर इसके पति को बुलाया गया। काउंसलिंग के दौरान पति ने स्वीकारा कि उसने गलती की और पत्नी को सम्मान के साथ यहां से लेकर गया।

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वन स्टॉप सेंटर (सखी) में प्रताड़ित महिलाओं व किशोरियों को आश्रय देकर उनको एक छत के नीचे हर तरह की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। उनके घर को बसाने का काम किया जाता है। काउंसलिंग भोजन व रहने के साथ साथ और भी सेवाएं प्रदान की जाती हैं। यह प्रताड़ित महिलाओं को सहारा देने की सबसे अच्छी जगह है।

सरोज सिंह

प्रशासिका वन स्टॉप सेंटर शहडोल।

Posted By: Nai Dunia News Network

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