शहडोल। नईदुनिया प्रतिनिधि

आदिवासी अंचल में महिलाएं महफूज नहीं हैं। उनकी अज्ञानता का फायदा उठाकर कोई परिचित या फिर रिश्तेदार ही दुष्कर्म की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे मामलों में आदिवासी महिलाओं और युवतियों को जागरूक करने की बेहद आवश्यकता है।

पुलिस और समाजसेवी महिलाओं का मानना है कि आदिवासी क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने की बेहद आवश्यकता है। पुलिस जोन के चार जिलों में पिछले 6 माह में 72 महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई है। पूरे जोन में हर दूसरे दिन एक महिला के साथ दुष्कर्म की घटना हो रही है। जिन महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हुई हैं उनमें सर्वाधिक आदिवासी समुदाय की हैं। पुलिस पड़ताल में यह बात सामने आई है कि जागरुकता के अभाव में इन महिलाओं को धोखे में रखकर दुष्कर्म किया जा रहा है। पुलिस विभाग इस ओर लगातार महिलाओं को जागरुक करने के प्रयास में जुटा हुआ है इसके बाद भी आदिवासी अंचल तक यह अभियान नहीं पहुंच पा रहा है। जिस कारण आरोपित आदिवासी महिलाओं को जाल में फंसाकर दुष्कर्म की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

अज्ञानता का उठा रहे पूरा फायदाः आदिवासी अंचल में जिन महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं उनमें आरोपित महिलाओं की अज्ञानता का पूरा फायदा उठाते हैं।

उन्हें वे किसी न किसी बात का झांसा देकर अपने जाल में फंसा लेते हैं इसके बाद उनके साथ वे लगातार दुष्कर्म

करते हैं।

इस प्रकार के मामलों में सबसे ज्यादा पुलिस जांच में या शिकायतों में शादी का झांसा देने की बात सामने आती है। आरोपित यह जानते हुए भी महिलाओं को शादी का झांसा देते हैं कि वे उसके साथ शादी नहीं कर सकते।

महिलाओं को पुलिस के साथ मिलकर करें जागरुकः दुष्कर्म के ऐसे मामलों को रोकने के लिए समाज को पुलिस विभाग के साथ मिलकर आदिवासी महिलाओं को जागरुक करने की आवश्यकता है। आरोपित पहले महिलाओं को झांसा देते हैं इसके बाद दुष्कर्म करते हैं। जब वे अपने वादे से मुकरते हैं तब महिलाएं पुलिस के पास पहुंचती हैं और अपराध पंजीबद्ध होता है।

इनके अलावा भी ऐसे बहुत से प्रकरण हैं जहां आदिवासी महिलाएं दुष्कर्म का शिकार होने के बाद भी लोक-लिहाज के डर से पुलिस तक नहीं पहुंच पा रही हैं। इन्हें जागरुक करने के लिए सभी को आगे आना चाहिए। पुलिस विभाग इन दिनों महिला अपराध को लेकर सख्ती बरत रही है।