Sawan 2021: रवींद्र वैद्य, शहडोल। भोलेनाथ को जल्दी प्रसन्न होने वाला देवता माना जाता है। जितनी जल्दी रूठते हैं उससे भी जल्दी प्रसन्न भी हो जाते हैं। इतना ही नहीं इनका जहां मन लग जाता है वहीं ये अपना स्थान बना लेते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ था शहडोल के केलमनिया गांव में जहां पर भोलेनाथ ने अपना स्थान सदा के लिए बनाया हुआ है। किसी जमाने में केलमनिया गांव का नाम कैलमणि कुंज हुआ करता था।

बताते हैं कि यहां कैलाश पर्वत से भगवान भोलेनाथ जब अगस्त मुनि के आश्रम जाते थे तो यहां रूककर क्रीड़ा किया करते थे। यहां भोलेनाथ का मन रम गया और अपना निवास बना लिया। एक शिवलिंग के रूप में प्रकट हो गए और आज यहां जो शिवलिंग स्थापित है वह वही अतिप्राचीन शिवलिंग हैं जो प्रकट हुआ था। आज इसे शंकर घाट मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां की सारी व्यवस्था संत रामदास महाराज के जिम्मे है। सावन के महीने में यहां पर हजारों की संख्या में लोग पूजा अर्चना करते आते हैं।

सपना देकर प्रकट हुए थे भोलेनाथ

के लमनिया शंकर घाट शिव मंदिर के महंत रामदास ने नईदुनिया को बताया कि किसी जमाने में यहां जंगल हुआ करता था। जब भोलेनाथ ने यहां रहने का मन बनाया तो उन्होंने यहां रहने वाले राममिलन दास दउआ को स्वप्न में आकर कहा था कि मेरा नाम लोकभद्र है और मैं यहां रहना चाहता हूं। अमुक स्थान पर खोदाई कराईए वहां शिवलिंग के रूप में मैं प्रकट हुआ हूं। जब राममिलन दास ने यहां खोदाई कराई तो शिवलिंग निकला जिसे विधिविधान के साथ पूजा-अर्चना के साथ स्थापित किया गया। खोदाई में शिवलिंग के साथ सालिग्राम भी निकले थे जो आज भी यहां पर स्थापित हैं।

42 साल से संत रामदास कर रहे पूजा

संत रामदास ने बताया कि वह यहां पर आज से 42 साल पहले आए थे तब यहां जंगल ही जंगल हुआ करता था और जंगली जानवरों का डेरा था। इन्होंने यहां पर साफ सफाई कराने के बाद ग्रामीणों व भोले के भक्तों के साथ मिलकर परिसर को साफ सुंदर बनाया और आज तक यहां की सेवा कर रहे हैं। इनका कहना है कि इसके पहले वह अवध धाम में निवास करते थे। सावन के महीने में यहां हर दिन अनुष्ठान होता है और सोमवार के लिए विशेष पूजा अर्चना की जाती है। शिवरात्रि के दिन मेला लगता है और कार्तिक चतुर्दशी के दिन यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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