शहडोल (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले के पोषण पुनर्वास केंद्र खाली पड़े हुए हैं। हालत यह है कि जनवरी 2021 से लेकर अब तक किसी महीने में एनआरसी का टारगेट पूरा नहीं हुआ। जिला अस्पताल के एनआरसी में 20 बेड हैं जबकि बाकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अंदर बने एनआरसी में 10 बेड हैं। जिला मुख्यालय के एनआरसी को प्रतिमाह 40 का टारगेट रहता है और बाकी को प्रतिमाह 20 बच्चों के भर्ती का टारगेट है लेकिन किसी भी महीने टारगेट को पूरा नहीं किया जा सका है। इसमें महिला बाल विकास विभाग का मैदानी अमला ही जिम्मेदार है।

अभियान चला पर ज्यादा असर नहीं

जिले में संवेदना अभियान चलाया गया लेकिन इस अभियान से ज्यादा कुछ असर नहीं हुआ है। यह अलग बात है कि इस दौरान मैदानी अमला थोड़ा सक्रिय रहा और फोटो अपडेट कर अपनी उपस्थिति मैदान में दिखाता रहा। इस दौरान कुछ बच्चे भी एनआरसी में भर्ती कराए गए लेकिन अभियान के बाबजूद मामला जस का तस ही है। यह अलग बात है कि संवदेना अभियान के माध्यम से कमिश्नर राजीव शर्मा ने कुपोषण की नब्ज टटोलने पर फोकस किया। इसका कुछ हद तक सुखद परिणाम मिला है पर जिस तरह से एनआरसी खाली पड़े हैं उससे लगता है कि असर कम ही हुआ है।

एनआरसी में कुपोषित बच्चों के भर्ती की स्थिति

जिला अस्पताल के एनआरसी की बात करें तो यहां साल की शुरूआत से ही टारगेट को हासिल करने में गंभीरता नहीं दिखाई दी। जनवरी माह में 29, फरवरी में 36, मार्च में 21, अप्रेल में 11, मई में शून्य, जून में 35, जुलाई में 26, अगस्त में 16, सितंबर में 28 और अब तक अक्टूबर माह में 16 बच्चों को भर्ती कराया गया है। इस तरह से जो रिपोर्ट सामने है उसके मुताबिक किसी भी महीने में एनआरसी के बेड फुल नहीं हुए जबकि इस कुपोषण की स्थिति को लेकर लगातार अधिकारी मीटिंगों में चर्चा करते हैं।

फोलोअप फोन लगाकर पर नहीं कारगर

कोरोना काल के चलते यहां भर्ती होने वाले बच्चों का फोलोअप अब मोबाइल के माध्यम से ही होने लगा है। ऐसे में भी कुपोषण मिटाने में समस्या आ रही है। कई बार तो एनआरसी से लगातार बच्चे के माता पिता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को फोन लगाया जाता है पर या तो फोन बंद रहता है या फिर फोन की घंटी जाती है पर कॉल अटेंड ही नहीं की जाती है ऐसे में फोलोअप समय पर नहीं हो पाने से 14 दिन तक जो मेहनत बच्चे के कुपोषण मिटाने पर की जाती है वह बेकार चली जाती है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लें रूचि तो बेहतर परिणाम

महिला बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता यदि कुपोषण मिटाने के काम को एक मिशन के तौर पर लें तो निश्चित ही बच्चों के कुपोषण को दूर किया जा सकता है। इसके लिए उनको सचेत सतर्क और समर्पित होने की जरूरत है। महिला बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी शालिनी तिवारी का कहना है कि मैं हर मीटिंग में कार्यकर्ता व सहायिकाओं को इस बात के लिए प्रेरित करती हूं कि वे अपने अपने एरिया में कु पोषण मिटाने के लिए तत्पर रहें इसका परिणाम सामने आया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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