शहडोल, नईदुनिया प्रतिनिधि। रक्षाबंधन के दूसरे दिन 12 अगस्त को जिला जेल के अंदर जाकर बहनों को अपने भाइयों को राखी बांधने का मौका मिला। 11 अगस्त को भोपाल से निर्देश मिलने के बाद शुक्रवार को यह व्यवस्था की गई। राखी के दिन गुरुवार को इन बहनों को निराश होकर वापस लौटना पड़ गया था क्योंकि जेल अधीक्षक के पास इस तरह के कोई निर्देश नहीं थे कि वे बहनों को राखी बांधने के लिए अंदर आने की अनुमति देते।गुरूवार की शाम साढे पांच जब जेल अधीक्षक को निर्देश मिले तब उन्होंने शुक्रवार को मुलाकात के साथ साथ राखी बांधने की अनुमति दी।

जेल के अंदर राखी बांधते समय जहां बहनों के चेहरे पर भाई से मिलने की खुशी थी तो वहीं उनकी आंखें उस समय नम हो गईं जब उनको कहा गया कि आपका वक्त खत्म हुआ अब बाहर जाइए। राखी बांधते समय भाई बहन एकटक कुछ पल के लिए एक दूसरे को देखते रहे।

सुबह से ही लगने लगी थी जेल के बाहर भीड़

शुक्रवार को सुबह साढ़े आठ बजे से मुलाकात का समय दिया गया था और दोपहर दो बजे तक राखी बांधने की अनुमति दी गई थी, लेकिन यह सिलसिला तय समय के बाद तक चलता रहा।बहनों को जब इस बात का पता चला कि जेल में शुक्रवार को वे भाई से मिलकर राखी बांध सकती हैं तो उनको खुश होने का मौका मिला।सुबह 9 बजे से ही जिला जेल परिसर में बंदियों के स्वजनों का आना शुरू हो गया था।बहनों के हाथों में मिठाई का डिब्बा फल राखी मौजूद थी।

गेट पर की गई चेकिंग इसके बाद अंदर की अनुमति

जिला जेल के गेट पर ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।गेट पर ही एक टेबल रखी गई थी जहां पर मिठाई और राखी तथा अन्य सामान की चेकिंग आरक्षक कर रहे थे। इसके बाद अंदर पर्ची भेजी जा रही थी जब अंदर से पुकार आती तब गेट का ताला खुलता और फिर छोटे गेट से ही अंदर जाने की अनुमति मिल रही थी। बहनों को मुलाकात के लिए दस मिनट का समय दिया गया था। जेल अधीक्षक के कक्ष से ठीक बगल में बहनों को राखी बांधने के लिए बैठने की व्यवस्था की गई थी। अंदर बाहर दोनों ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। जेल अधीक्षक भास्कर पांडेय ने बताया कि निर्देश मिलने के बाद शुक्रवार को बहनों को जेल के अंदर राखी बांधने की अनुमति दी गई।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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