शहडोल। (नईदुनिया प्रतिनिधि) शहडोल जिला अस्पताल में 48 घंटे में छह बच्चों की मौत के बाद हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से नवजातों की मौत ने तूल पकड़ लिया है। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही पर प्रशासन के कान खड़े हो गए और संभागायुक्त नरेश पाल ने आपातकालीन बैठक बुलाकर मामले की समीक्षा की। सीएमएचओ डॉ. राजेश पांडेय ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच करने तथा जल्द ही रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए।

बच्चों की मौत की वजह मैदानी अमले की लापरवाही और बच्चों का समय पर उनका जिला अस्पताल न पहुंचना है। यही नहीं अस्पताल में वेंटिलेटर सहित एसएनसीयू और पीआईसीयू में बिस्तरों की कमी है।

फिर दो बच्चों की हालत नाजुक: सोमवार को अनूपपुर जिले से रेफर होकर आए दो बच्चों की हालत नाजुक हो जाने के कारण उन्हें चिकित्सकों ने उन्हें जबलपुर रेफर किया। अनूपपुर के थाड़ीपाथ्ार गांव के दंपती शिवदास चंद्रवती बघेल की तीन माह की बच्ची को जबलपुर के लिए रेफर किया गया। 5 दिन पहले बच्ची को अनूपपुर से रेफर कर शहडोल लाया थाा। जब बच्ची को ले जाने लगा तो, उसकी तकलीफ बढ़ गई तो फिर एसएनसीयू में भर्ती कर दिया गया। दूसरा मामला भी अनूपपुर का है। तीन दिन पहले शिव प्रसाद ने तीन माह के बच्चे को यहां भर्ती कराया था। बच्चेे को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी चिकित्सकों ने उसे भी रेफर करने की सलाह दी, लेकिन परिजनों ने इंकार कर दिया। शिव प्रसाद का तीन माह का बच्चा एसएनसीयू में ही भर्ती है।

कागजों में मैदानी अमले का कोरम: जिन बच्चों की मौत हुई है उसमें में लगभग इसी चैन से जिला अस्पताल पहुंचे थे। बच्चों के बीमार होने के बाद जमीनी स्तर पर काम कर रहे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और प्राथमिक व उप स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों की लापरवाही इन केसों के बिगड़ने का प्रमुख कारण रही। विकासखंडों के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मैदानी अमले के कर्मचारियों से जमीनी स्तर पर न तो उतना काम ले पा रहे हैं जितनी उन्हें जिम्मेदारी दी गई है। महज कागजी कोरम पूरा कर आंकड़े भरे जा रहे हैं जिस कारण इस तरह के मामले सामने आते हैं।

चार वेंटिलेटर, 20 बेड और 40 बच्चे : जिला अस्पताल में चिकित्सकों की टीम और पर्याप्त दवाइयां तो हैं, लेकिन एसएनसीयू और पीआईसीयू में मरीजों का जितना दबाव है उसके अनुपात में वेंटिलेटर और बेड नहीं है। एसएनसीयू में सिर्फ 4 वेंटिलेटर हैं और बेड 20 हैं लेकिन भर्ती बच्चों की संख्या 40 है। यही स्थिति पीआईसीयू की है जिसमें 10 बेड है और सभी भरे हुए हैं।

इनका कहना है

बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद हमने उसकी समीक्षा की और इस मामले में पैरामेडिकल स्टाफ की गलतियां सामने नहीं आई हैं। इसमें मैदानी अमले की लापरवाही है। बच्चों को देर से जिला अस्पताल आकर भर्ती किया गया। स्वास्थ्य अधिकारियों को जमीनी स्तर की मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए हैं।

नरेश पाल, कमिश्नर, शहडोल संभाग

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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