सुसनेर। मंगलवार को वार्ड आरक्षण के बाद नगर परिषद सुसनेर में निकाय चुनाव को लेकर सरगर्मियां ते हो गयी है।

प्रशासन जहां चुनावी तैयारियां के लिए कमर कस रहा है तो वही राजनीतिक दल नगर परिषद अपनी अपनी बनाने की रणनीति में लग गए है।

बुधवार को सरकार द्वारा राज्यपाल मंगू भाई पटेल को भेजे महापौर के प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव एवं नगर पालिका एवं परिषद में अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता से ना करवाकर पार्षदों से करने के मसौदे पर राज्यपाल की मोहर लगने के बाद कई उम्मीदवारों के मंसूबो पर पानी फिर गया। जो धनबल एवं ऊपर से डायरेक्ट अध्यक्ष के चुनाव में ऊपर से मेंडेट लाने की जुगाड़ में लगे हुए थे अब उनके वार्डो के आरक्षण होने बाद कौन से वार्ड से लड़े इसके भी फजिते पड़ गए है।

अब पार्षदों से अध्यक्ष के चुनाव के नियम से कोई भी व्यक्ति अध्यक्ष बन सकता है जिसका पास 8 पार्षदों के बहुमत हो।

परन्तु अब अध्यक्ष बनने का ख्वाब पाले उम्मीदवारो को पहले पार्षद का सेमीफाइनल चुनाव जीतना होगा उसके बाद अध्यक्ष बनने की मश-त अलग से करना

होगी जिसमें आधे भावी अध्यक्ष मैदान से बाहर हो गए। इस बार नगर परिषद सुसनेर के पंद्रह पार्षदों के चुनाव के लिए 17 मतदान केन्द्र बनाये गए है जिनमे नगर परिषद के 12847 मतदाता पंद्रह पार्षदों के लिए चुनाव में मतदान करेगे।

इस बार वार्ड क्रमांक 07 में 1156 मतदाता होने से इस वार्ड में दो मतदान केंद्र बनाए गए है वही वार्ड क्रमांक 10 में भी 1500 से अधिक मतदाता होने से उक्त वार्ड में भी 2 मतदान केंद्र बनाए गए है इस कारण इस बार

मतदान केंद्रों की संख्या 15 से बढ़कर 17 हो गयी है। वही अभी अध्यक्ष का आरक्षण भोपाल से फिर से होने है उस पर सभी की निगाह टिकी हुई है क्योंकि अभी अनारक्षित अध्यक्ष पद का आरक्षण पिछले साल हुआ था। परन्तु इस बार तो वैसे अध्यक्ष पद आरक्षण अधिकांश लोगों को पुनः अनारक्षित ही होने की संभावना ज्यादा लग रही है वही अगर आरक्षण में बदलाव होता है तो फिर अध्यक्ष के उम्मीदवारों का भी गणित पूरा उलट हो जाएगा। और अप्रत्यक्ष प्रणाली से अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों की संख्या में जो कमी आई वो अध्यक्ष के आरक्षण के बाद ओर ज्यादा कमी उक्त पद के उम्मीदवारों में आ सकती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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