आगर-मालवा (नईदुनिया न्यूज)। जिले में तीन वर्ष से संचालित देश के पहले सालरिया सुसनेर स्थित कामधेनु गो अभयारण्य में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान गोपाष्टमी पर रविवार को पहुंचे। करीब 4 घंटे तक यहां रहते हुए गो पूजन किया।अभयारण्य परिसर का भ्रमण किया। 36 लाख 55 हजार रूपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया और सभा को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने यूरिया व डीएपी को धीमा जहर बताते हुए गोबर की खाद और अंतिम संस्कार व होलिका दहन में कंडों का उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की गो कैबिनेट गोशालाओं के बेहतर क्रियान्वयन और संचालन के लिए जनता से छोटा-मोटा टैक्स वसूल कर व्यवस्था बनाने के पर काम कर रही है। सभा के पहले वैज्ञानिकों व गौ संरक्षण व संवर्धन से जुड़े विशिष्टजन के साथ संगोष्ठी में सीएम ने कहा कि सालरिया में गायों के संबंध में रिसर्च सेंटर बनाने के निर्देश नानाजी देशमुख विश्वविद्यालय के कुलपति को दिए जा चुके हैं। यहां राष्ट्रीय सेवा योजना के कैंप लगें, इसके प्रयास भी हों। यह अभयारण्य समग्र रूप से स्वावलंबी गोशाला का उदाहरण बने, इसके प्रयास किए जाएंगे।

सभा में मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास हम गोमाता में मानते हैं। अनादिकाल से हमारे संतों-मुनियों से गोमाता की सेवा की है। गोमाता की पूजा की है पहले खेती तो गोवंश की होती थी जब से ट्रैक्टर महाराज आए हैं हमारा गोवंश संकट में है। जो श्रद्घा का भाव था वह कहीं न कहीं कम हुआ है। इसलिए लाखों की संख्या में गोवंश सडक़ों पर भटक रहा है। हमने तय किया था कि कुछ अभयारण्य ऐसे बना दें जहां गोमाता रहे। उन्हें सडको पर नहीं भटकना पड़े। इसलिए सालरिया में गो अभयारण्य की स्थापना की थी। ध्यान रखना गोमाता का दूध अमृत का काम करता है इसलिए मैंने तय किया है कि मध्यप्रदेश में भैया आंगनवाड़ी में अंडा नहीं देंगे अति कुपोषित बच्चों को गाय का दूध देंगे। दूध पीएंगे तो दूध बिकेगा भी। दूध बिकेगा तो गोपालन करने वालो ंको लाभ मिलेगा और गोशाला भी चलेगी। केवल दूध नहीं गाय का हर उत्पाद अमृत है।

गाय बचेगी तो धरती सुरक्षित रहेगी

सीएम ने कहा कि यूरिया डीएपी धीमा जहर है, जो धरती को धीरे-धीरे नष्ट कर रहा है। इसका उपयोग बंद नही किया तो आने वाले समय में गेहूं-चने की फसल नहीं हो पाएगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि गोबर खाद का उपयोग करें। होलिका दहन और अंतिम संस्कार में कंडों का उपयोग करें। जिससे पेड़ और पर्यावरण बचेगा। गो मूत्र से कई तरह की दवाइयां गोशालाओं में बनाई जा रही हैं। जिसका सेवन एलोपैथी दवाई की तुलना में स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है। उन्होंने गोबर के महत्व की चर्चा में बताया कि गोबर से अगर घर लीप दो तो रेडिएशन से जो गलत किरणें आती हैं वे हमें नुकसान नहीं पहुंचा पाती। सबसे सुरक्षित हमारा घर रहता है। जिस घर में गोमाता रहती है वहां सकारात्मक ऊर्जा बहती है।

रिसर्च सेंटर शुरू होगा

मुख्यमंत्री चौहान ने आगे कहा कि इस गो अभयारण्य में रिसर्च सेंटर शुरू करने वाले हैं। प्रशिक्षण की व्यवस्था भी बनाएंगे। परिसर में पेड़-पौधे, तालाब, स्टॉपडैम एवं अभयारण्य की बाउंड्रीवॉल बनवाएंगे। इस स्थान को गो पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित करेंगे। वन विभाग की खाली जगह पर चरागाह विकसित कराने का काम पूरे प्रदेश में करेंगे। गोशाला के बेहतर संचालन के लिए कानून बनाएंगे। भूमि आवंटन के लिए नियम बनाएंगे। प्रदेश में दो हजार गोशालाएं खोलेंगे। गायों के इलाज के लिए ठप पड़ी संजीवनी योजना फिर चालू की जाएगी। गोशालाओं में बिजली पानी के प्रबंधन की व्यवस्था करेंगे। सरकारी कार्यालयों में गो मूत्र से तैयार कीटनाशक का उपयोग फिनाइल के रूप में किया जाएगा।

गो ग्रास के रूप में टैक्स लगाएंगे

सीएम ने कहा कि गो माता की अगर हमको रक्षा करनी है तो अकेली सरकार नहीं समाज को भी साथ होना चाहिए। गोशालाओं के संचालन के लिए पुराने समय में एक और व्यवस्था थी गो ग्रास। हम अपना भोजन करने के पहले गो माता के लिए कुछ न कुछ निकालते थे। पहली रोटी गो को और आखिरी रोटी कुत्ते को। इतना ध्यान भी भारतीय संस्कृति में रखा गया है। अब वह इतिहास तो धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। इसलिए यह भी सोच रहा हूं कि हम जनता से ही कोई छोटा-मोटा टैक्स लगाकर गो माता की गोशालाओं के लिए पैसा लेंगे ताकि गोशाला को काम आए। इसी के साथ अन्य कई योजनाएं बनाएंगे ताकि गोशालाओं का काम ढंग से चल सके। सीएम चौहान ने मंच से प्रत्येक कलेक्टर को निर्देश दिए कि प्रत्येक जनपद स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें जो अपने क्षेत्र की ग्रामीण गोशालाओं का सतत भ्रमण करते हुए गोशालाओं के संचालन को बेहतर बनाने का काम करेंगे।

इन कार्यो का हुआ भूमिपूजन

मुख्यमंत्री चौहान ने सालरिया गो अभयारण्य से जुड़े विकास कार्यो का भूमिपूजन किया, जिनमें नवीन तालाब फरसपुरा में 14 लाख 61 हजार, सेमली के रास्ते पर फरसपुरा चेक डेम निर्माण 9 लाख रूपए, डग आउट पौण्ड निर्माण अनुसंधान केन्द्र के पास एवं आवासीय परिसर के पास गो अभयारण्य फरसपुरा में 3.33-3.33 लाख तथा कंटूर ट्रेंच निर्माण गोशाला के रास्ते के पास 5 लाख 95 हजार रुपए के कार्य शामिल हैं। कार्यक्रम में पशुपालन मंत्री प्रेमसिंह पटेल, गो संवर्धन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंदजी गिरी, मेघराज जैन एवं सांसदद्वय रोड़मल नागर, महेन्द्रसिंह सोलंकी, विधायक सुसनेर राणा विक्रमसिंह, पूर्व विधायकगण, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंदसिंह बरखेड़ी, मनोज ऊंटवाल एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया, कलेक्टर अवधेश शर्मा, एसपी राकेश सगर, उपसंचालक पशु डॉ. एसवी कोसरवार सहित अधिकारी उपस्थित थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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