टेसू-झेंझी का विवाह आज

आगर-मालवा। नईदुनिया न्यूज

टेसू गया टेसन से पानी पिया बेसन से..., नाच मेरी झिंझरिया.. आदि गीतों को गाकर उछलती-कूदती बच्चों की टोली आपने जरूर देखी होगी। हाथों में पुतला और तेल का दीपक लिए यह टोली घर-घर जाकर चंदे के लिए पैसे मांगती हैं। कोई इन्हें अपने द्वार से खाली हाथ ही लौटा देता है, तो कहीं ये गाने गाकर लोगो का मनोरंजन करते हैं। मकसद सिपर्ᆬ एक होता है, चंदे के पैसे इकट्ठे कर टेसू-झंझी के विवाह को धूमधाम से करना।

किसी जमाने में अपने अनोखे प्रेम के लिए सुविख्यात टेसू और झेंझी विवाह परंपरा को आज की युवा पीढ़ी भूलती जा रही है। अगर हम इतिहास के पन्नों पर नजर डाले तो पता चलता है कि किसी समय में इस प्रेम कहानी को परवान चढ़ने से पहले ही मिटा दिया गया था। लेकिन उनके सच्चे प्रेम की उस तस्वीर की झलक आज भी यदाकदा देखने को मिल ही जाती है। शहर के लोग तो इसे लगभग पूरी तरह भूल ही चुके हैं। नगर के बड़ा गवलीपुरा में यह परंपरा आज भी जीवित है। जहां आज टेसू- झेंझी का विवाह बच्चों व युवाओं द्वारा रीति-रिवाज व पूरे उत्साह के साथ कराया जाएगा।

ऐसे होता है विवाह

टेसू-झेंझी नामक यह खेल बच्चों द्वारा नवमी से पूर्णमासी तक खेला जाता है। इससे पहले 16 दिन तक बालिकाएं गोबर से चांद-तरैया व संझा माता बनाती हैं। वहीं नवमी को सुअटा की प्रतिमा बनाकर टेसू-झेंझी के विवाह की तैयारियों में लग जाती है। पूर्णमासी की रात को टेसू-झेंझी का विवाह पूरे उत्साह के साथ बच्चों द्वारा किया जाता है। वहीं, मोहल्लों की महिलाएं व बड़े-बुजुर्ग भी इस उत्सव में भाग लेते है। प्रेम के प्रतीक इस विवाह में प्रेमी जोड़े के विरह को बड़ी ही खूबसूरती से दिखाया जाता है। हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार लड़के थाली-चम्मच बजाकर टेसू की बरात निकालते हैं। वहीं, लड़कियां भी शरमाती-सकुचाती झिंझिया रानी को भी विवाह मंडप में ले आती है। फिर शुरू होता है ढोलक की थाप पर मंगल गीतों के साथ टेसू-झेंझी का विवाह। सात फेरे पूरे भी नहीं हो पाते और लड़के टेसू का सिर धड़ से अलग कर देते हैं। वहीं, झेंझी भी अंत में पति वियोग में सती हो जाती है।

12एजीआर12 - आगर में टेसू को लेकर मोहल्ले व बाजार में चंदा इकट्टा करते हैं बच्चे।

Posted By: Nai Dunia News Network