शुजालपुर। प्रदेश सरकार ने करोड़ों रूपये खर्च कर ग्राम पंचायतों के माध्यम से गोशाला का निर्माण कर चैपायों को आसरा मिलेगा ऐसा खूब ढिंढोरा पीटा था, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। गांव-गांव में बनी गोशाला का सर्वे किया जाए तो इन गोशाला में इक्का-दुक्का गाय होंगी। क्षेत्र के आसपास ही करीब 12 गोशाला हैं लेकिन चैपाए आज भी सड़कों पर ही विचरण कर रहे हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि गाय के नाम पर राजनीति करने वाली सरकार के राज्य में ही गाए दर-दर भटकने को मजबूर है।

गांव-गांव में गोशाला खोलने की के बावजूद गांव हो या शहर की सड़कों के बीच मवेशी बैठे देखे जा सकते हैं। चौपाए के दर-दर भटकने से गोशाला को बनाए जाने का औचित्य समझ से परे लगने लगा है। गोशाला में जब मवेशी ही नहीं रखना था तो गोशाला बनाकर उसमें जनता की गाड़ी कमाई का पैसा फिजूल खर्च करने का कोई औचित्य नहीं लगता। सिटी - मंडी फोरलेन मार्ग से लेकर पचोर रोड व आष्टा रोड़ पर आवारा मवेशियों के झुंड के झुंड़ सड़कों पर बैठे दिखेंगे या फिर सड़क के बीच चहलकदमी करते दिखेंगे। इन चौपायों के कारण आए दिन दुर्घटना हो रही है। इसके बावजूद न प्रशासन कोई ठोस कदम उठा रहा है और न ही शासन। हां यह जरूर है कि ग्राम पंचायतों को भ्रष्टाचार करने का खूब अवसर मिला जिसके कारण सरपंचों के वारे-न्यारे हो गए। सड़कों पर खुले में विचरण करने से दो दिन पूर्व एक युवक की मौत चैपायों टकराकर हो गई थी उसके बाद से यह प्रश्न खड़े किए जा रहे हैं कि जब गांवों में गोशाला बनाई गई तो इन मवेशियों को सडक पर खुला क्यों छोड़ा जा रहा है। इन चौपायों कों क्यो खुले में छोड़ा जा रहा है। प्रदेश सरकार व जनप्रतिनिधियों द्वारा बार-बार यह बात कही जा रही है कि गोमाता सड़क पर नहीं रहे इसलिए गोशाला का निर्माण किया जा रहा है। इस काम को पूर्व की कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू किया गया था, जिसको वर्तमान भाजपा की सरकार द्वारा पूरा किया जा रहा है। सिटी मंडी फोरलेन मार्ग को तो बड़ा बुरा हाल है एक तरफ डिवाइडर बनाने का काम चल रहा है जिसक कारण बीच सडक पर मिट्टी पड़ी है। वही दूसरी ओर किसी के भवन निर्माण चल रहा है उसने सड़क तक मटेरियल डाल रखा है। कहीं अतिक्रमण ने सड़क मार्ग को अपनी चपेट में ले रखा है। ऐसे में मवेशियों के खड़े होने के कारण दुर्घटना का भय बना हुआ है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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