Ganeshotsav 2021: शाजापुर। बप्पा की विशालकाय मूर्तियां व मंदिर तो सभी ने देखी होंगी, लेकिन शाजापुर में महज सवा हाथ की ऊंचाई जितना मंदिर है। इस मंदिर में चार हाथ के गणपति विराजमान हैं। शहर में यह मंदिर पीढियों से लोग देखते आ रहे हैं। यह भक्तों की आस्था का केंद्र है। गणेशोत्सव को लेकर भक्तों में अलग ही उत्साह नजर आ रहा है। रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश घर-घर विराजे हुए हैं। विघ्नहर्ता के लिए भक्त पलक पावड़े बिछाए हुए हैं।

प्राचीन मंदिरों में से ही एक शहर के मीरकला बाजार स्थित विघ्नहर्ता का मंदिर भी है। यह मंदिर क्षेत्र का सबसे छोटा मंदिर कहा जा सकता है। मीरकला गेट के नीचे स्थित इस मंदिर की ऊंचाई मात्र सवा हाथ जितनी है। वहीं मंदिर में स्थित बप्पा की मूर्ति के चार हाथ हैं।

उल्लेखनीय है कि शाजापुर शहर में 1600 वीं सदी का शाहजहां कालीन किला बना था। किले के निर्माण के साथ ही किला रोड, मीरकला, सोमवारिया व कसेरा बाजार चार प्रवेश द्वार भी बनाए गए थे। इन्हीं में से मीरकला क्षेत्र का प्रवेश द्वार है। उसी के नीचे भगवान गणेश का छोटा सा मंदिर है। यहां की पूजन-पाठ, सेवा मंदिर समीप की दुकान संचालित करने वाले गुप्ता परिवार के लोग करते हैं। मंगलमूर्ति को समय-समय पर चोला भी चढ़ाया जाता है। वर्तमान मे गणेशोत्सव के दौरान बप्पा को चोला चढ़ाया गया है।

दर्शन करने से पूरी होती है मन्नत

महेश्वर (खरगोन)। महेश्वर के महावीर मार्ग पर अतिप्राचीन गोबर गणेश मंदिर है। यहां भगवान की मूर्ति गोबर से बनी हुई है। गुप्तकालीन चौथी व पांचवीं शती में गोबर व मिट्टी की मूर्तियां बनाई जाती थीं। मूर्ति के दो हाथ व सूंड बाईं ओर मुड़ी रहती थीं। गोबर गणेश की मूर्ति गुप्तकालीन मूर्ति से मिलती है।

नारद पुराण में वर्णन है कि गोबर में लक्ष्मी का (वास) स्थान होने से गणेश जी की उपासना गोबर की बनी मूर्ति पर की जाती है। मंदिर के पुजारी पं. मंगेश जोशी ने बताया कि मान्यता है कि भगवान की चौखट से कोई भी खाली हाथ नहीं जाता है। सभी की मनोकामना पूर्ण होती है।

उन्होंने बताया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के पूजन के लिए हमारे पूर्वज गोबर या मिट्टी से ही गणपति का बिंब बनाकर पूजा करते थे। आज भी यह प्रथा प्रचलित है। शोणभद्र शिला या अन्य सोने-चांदी से बने हुए बिंब को पूजा में नहीं रखते, क्योंकि गोबर में लक्ष्मी का वास होता है। इस प्रकार गोबर व मिट्टी से बनी गणेश मूर्तियों को पूजा में ग्रहण करते हैं। इस कारण गणपति में भूतत्व है। मंदिर में गणेशोत्सव में प्रतिदिन धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने पहुंच रहे हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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