शाजापुर। कोरोना संक्रमण के कारण बीते दो साल से कालेज में प्रवेश प्रक्रिया की व्यवस्था गड़बड़ाई हुई थी। बीते साल ही प्रवेश प्रक्रिया काफी देरी से प्रारंभ होकर लंबी चली थी। किंतु इस बार कोरोना संक्रमण का असर नही होने से प्रवेश प्रक्रिया तय समय पर प्रारंभ हो गई है। प्रवेश की यह प्रक्रिया जुलाई माह तक चलेगी। जिसमें प्रवेश के लिए पहले चरण में आनलाइन प्रवेश के साथ ही कालेज लेवल काउसलिंग के होंगे। लीड बीकेएसएन कालेज से प्राप्त जानकारी अनुसार प्रवेश प्रक्रिया में इस बार तीन प्रमुख बदलाव किए गए हैं। जो विद्यार्थियों के लिए काफी लाभदायक है। खास बात यह है कि बिना टीसी और माइग्रेशन प्रमाण पत्र के भी वतन पत्र के आधार पर विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी अनुसार पहले चरण में छात्राओं को प्रवेश फीस नहीं देना होगी। वहीं छात्रों के लिए 100 रुपये फीस देना होगा। जबकि दूसरे चरण में 250 रुपये एवं तीसरे चरण में 500 रुपये प्रवेश फीस के

रूप में देने होंगे। विद्यार्थियों को 50 रुपये पोर्टल शुल्क अलग से देना होगा। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इस बार कालेजों की यूजी-पीजी सीटों में प्रवेश के लिए केवल एक मुख्य राउंड चलाया जाएगा।

इसके अलावा तीन चरण कालेज लेवल काउसलिंग (सीएलसी) के होंगे। 17 मई से प्रारंभ हुए यह पूरी प्रक्रिया 11 जुलाई तक चलेगी। मुख्य चरण के बाद पहला सीएलसी चरण तीन से 23 जून तक, दूसरा सीएलसी चरण 13 जून से दो जुलाई तक चलेगी। इसके बाद चौथा व अंतिम सीएलसी चरण 22 जून से शुरू होकर 11 जुलाई तक चलेगी। प्रवेश प्रक्रिया को लेकर शुरूआत में विद्यार्थियों में कम

उत्साह देखा जा रहा है।

प्रवेश के लिए कर रहे प्रेरित

हायर सेकंडरी परीक्षा पास करके उच्च शिक्षा के लिए कालेज में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित भी किया जा रहा है। जिसके तहत कालेज प्रबंधन द्वारा कालेज चलो अभियान भी उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर चलाया जा रहा है। जिसके तहत कालेज प्राचार्यों व प्रोफेसरों द्वारा स्कूलों में संपर्क कर हायर सेंकडरी परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों की जानकारी

जुटाने के साथ उन्हें कालेज में प्रवेश के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।

लीड कालेज में साढ़े तीन हजार सीटें

जिले के लीड कालेज में सबसे ज्यादा सीट पर प्रवेश होंगे। यहां यूजी और पीजी की कुल साढ़े तीन हजार के करीब सीट हैं। जिन पर प्रवेश के लिए प्रक्रिया चल रही है। लीड कालेज में कुछ ऐसे संकाय हैं, जिनमें हर साल सीट लगभग पूरी भर जाती हैं। वहीं कुछ संकाय ऐसे हैं जिनमें बड़ी संख्या में सीट खाली रह जाती हैं। पीजी कोर्स में सीट खाली रहने की स्थिति ज्यादा बनती है। कालेज प्रबंधन का कहना है कि अधिक से अधिक प्रवेश के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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