आगर मालवा प्रदीप अजमेरा (नईदुनिया)

किसान के पास रहने वाला सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज जिसमें जमीन की पूरी अधिकृत जानकारी होती हैं। इसे भू-अधिकार पुस्तिका कहा जाता हैं। सामान्य बोलचाल की भाषा में किसान इसे पावती कहते हैं, को प्राप्त करने के लिए किसानों को अब तहसील कार्यालय व पटवारियों के चक्कर नही लगाने पड़ेंगे। किसान इसे लोक सेवा केंद्र व आइटी केंद्र (एमपी ऑनलाइन) व कियोस्क सेंटर से भी निकाल सकेंगे तथा इसके लिए किसान को निर्धारित शुल्क के अलावा कोई अतिरिक्त शुल्क भी नही देना होगा।

तीन दिसम्बर को राजस्व विभाग मंत्रालय द्वारा संभागायुक्त, कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसीलदार व नायब तहसीलदारों को पत्र जारी किया हैं। जिसमें किसानों को पूर्व में मिल रही ऑनलाइन सुविधा के अलावा नई सुविधा भू-अधिकार पुस्तिका ऑनलाइन निकाले जाने का उल्लेख हैं। पत्र में शुल्क कितना होगा तथा किसान उसे कैसे प्राप्त करेंगे, इसकी भी जानकारी दी गई है। पत्र में यह बताया गया हैं कि भू-अधिकार पुस्तिका प्राप्त करने के लिए सम्बंधित किसान लोक सेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन कर सकता हैं। आवेदन का पंजीयन लोकसेवा केंद्र पर ऑपरेटर द्वारा ऑनलाइन किया जाएगा, आवेदन भरते समय किसान को मोबाईल नम्बर, आधार नम्बर, समग्र आइडी तथा आवेदक द्वारा ई-मेल एड्रेस यदि उपलब्ध हो तो भरना होगा। लोक सेवा केंद्र पर आवेदन ऑनलाइन दर्ज होते ही सम्बंधित पदाभिहित अधिकारी के अकाउंट में ऑनलाइन यह उपलब्ध हो जाएगा तथा अधिकारी द्वारा पहले आए, पहले पाए के आधार पर आवेदन का निराकरण किया जाएगा। भू-लेख पोर्टल के माध्यम से कम्प्यूरीकृत भू-अधिकार पुस्तिका की डिजिटल हस्ताक्षर प्रति डाउनलोड की जा कर निर्धारित समय सीमा में आवेदक को प्रदाय की जाएगी। आवेदन की यही प्रक्रिया अपना कर किसान आइटी केंद्र से भी भू-अधिकार पुस्तिका की कम्प्यूरीकृत कॉपी निकला सकेगा। भू-अधिकार पुस्तिका ए-4 साइज के कम से कम दो पृष्टों की होगी। जो किसान को 45 रूपये में उपलब्ध होगी। पृष्टों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त पृष्ट का मुल्य देना होगा।

यह मिलेगा किसानों को फायदा

भू-अधिकार पुस्तिका का उपयोग किसान सहकारी समिति से खाद बीज लेने के अलावा बैंक से ऋण लेने जमीन का क्रय विक्रय करने व न्यायालय में जमानत आदि देने के लिए करता हैं, इसके अलावा शासन की सुविधाओं का लाभ लेने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता हैं। किसान को भू-अधिकार पुस्तिका प्राप्त करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। इसके लिए किसान को तहसील कार्यालय व पटवारी के चक्कर लगाने पडते थे। कई बार यह भी शिकायते प्राप्त होती थी कि भू-अधिकार पुस्तिका जारी करने के बदलते पटवारी द्वारा मुहमांगी रकम मांगी जा रही हैं। कुछ माह पहले जिले में भू-अधिकार पुस्तिका उपलब्ध नही थी। कोरोना के चलते पुस्तिकाएं प्रिंट न होने के कारण किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। जिसके कारण किसान जमीनों का न तो समय पर क्रय विक्रय कर पाए न बैंक से ऋण ले पाए। किसान को अब यह परेशानी नही होगी। किसान डिजिटल हस्ताक्षर वाली भू-अधिकार पुस्तिका से अपने आवश्यक कार्य समय पर कर लेगा।

रुकेगी धोखाधड़ी

कई शातिर लोग मूल भू-अधिकार पुस्तिका का उपयोग करके बैंक से ऋण ले लेते थे तथा बाद में डुप्लिकेट जारी करवा लेते थे। कई लोगों ने दूसरी कॉपी जारी करवाकर अलग-अलग बैंकों से ऋण लेकर धोखाधड़ी कर ली। जिसके कई मामलें सामने आ चुके हैं। वही भू-अधिकार पुस्तिका गलत व्यक्ति के हाथों में चले जाने से कई लोगों में किसानों की जमीन तक बेच डाली। इस प्रकार की धोखाधडी इस डिजिटल भू-अधिकार पुस्तिका से रूकेगी तथा भू-अधिकार पुस्तिका छापने में शासन की जो राशि खर्च होती थी वह भी अब नही होगी।

जल्द दिया जाएगा राजस्व अधिकारियों को प्रशिक्षण

राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी के हस्ताक्षर से जारी हुआ पत्र प्राप्त होने के बाद अधिकारियों ने अपनी तैयारी कर ली हैं, जल्द ही पटवारियों व राजस्व अधिकारियों को इसके सम्बंध में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यदि आवश्यकता हुई तो लोकसेवा केंद्र व आइटी सेंटर संचालकों को भी प्रशिक्षण दिया जा सकता हैं। अधिकारियों की तैयारी को देखकर लगता हैं कि किसानों को यह सुविधा जल्द मिलने लगेगी।

वरिष्ठ कार्यालय से इस सम्बंध में पत्र प्राप्त हो चुका है। किसानों को यह महत्वपूर्ण सेवा जल्द ऑनलाइन मिलें, इसके लिए जल्द ही पटवारियों व राजस्व अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। -राजेश सरवटे, अधीक्षक भू-अभिलेख जिला आगर मालवा।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local