शाजापुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों को लेकर इस साल अब तक स्थिति बेहतर रही है। दरअसल पिछले साल की तुलना में इस बार मरीजों की संख्या में कमी आई है। वहीं विशेष बात यह है कि मरीजों की जांच पिछले साल से ज्यादा की गई है। जांच लक्ष्य से ज्यादा व केस कम निकलने पर विभागीय अमले ने भी राहत की सांस ली है।

यूं तो सालभर ही मच्छर पनपते हैं, लेकिन वर्षाकाल समाप्त होने के बाद मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे में विभाग द्वारा जमा पानी की निकासी करने सहित दवाओं का छिड़काव, सर्वे, प्रचार-प्रसार आदि का कार्य किया जाता है। वहीं हर बुखार मलेरिया हो सकता है, इस संभावना को देखते हुए मरीजों की रक्त की जांच की जाती है। इन ब्लड स्लाइड बनाने के लिए बकायदा स्वास्थ्यकर्मियों को लक्ष्य दिए जाते हैं। इस साल कई समय तक लगे लॉकडाउन व लगातार बने हुए कोरोना संकट के बीच भी स्वास्थ्यकर्मियों ने लगातार अपना काम किया। नतीजतन इस बार ब्लड स्लाइड लक्ष्य से भी ज्यादा बनाई गई।

जानकारी अनुसार 1 जनवरी से लेकर 15 नवंबर तक 1 लाख 8 हजार 129 मरीजों की ब्लड स्लाइड बनाने का लक्ष्य था। अमले द्वारा एक लाख 9 हजार से ज्यादा ब्लड स्लाइड बना दी गई। यह लक्ष्य का 101.21 फीसद रहा। वहीं विशेष बात यह रही कि लक्ष्य से ज्यादा स्लाइड बनाने के बावजूद मच्छरजनित बीमारियों के मरीजों की संख्या कम निकली है। जानकारी अनुसार इस बार सात मलेरिया के तो डेंगू व चिकनगुनिया के चार केस निकले हैं। यह पिछले साल की अपेक्षा कम है। दरअसल, पिछले साल 2019 में मलेरिया के 28 केस आए थे। जबकि सात केस डेंगू व चिकनगुनिया के रहे थे।

विभाग की लोगों को सलाह

मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए विभाग द्वारा लोगों को जागरूक किया जा रहा है। विभागीय अमले द्वारा लोगों को सलाह दी जा रही है कि वह घरों में कंटेनर में पानी पर टेमोफास का छिड़काव किया जा सकता है। सीमेंट की टंकियों में से पानी की निकासी सात दिन में कर लेना चाहिए। वहीं तालाब, स्टॉपडेम एवं बारिश के जमा पानी में गंबुसिया मछली का संचय किया जा सकता है। गंबुसिया मछली मच्छरों के लार्वा को पानी में खा सकती है। घर में रात्रि में मच्छरदानी में सोएं। शाम के समय घरों मे नीम की पत्ती का धुंआ किया जा सकता है। खिड़की, दरवाजों आदि में मच्छर प्रूफ जाली लगवाएं एवं पूरी बांह के कपड़े पहनें।

लोग भी हुए जागरूक

मच्छजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए पूरी टीम ने बेहतर काम किया है। वहीं लगातार प्रचार-प्रसार के असर से लोगों में भी जागरूकता बढ़ी है। सभी प्रयासों का नतीजा यह रहा कि मलेरिया, डेंगू व चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या में कमी आई है।

-आरएस जाटव, जिला मलेरिया अधिकारी

Posted By: Nai Dunia News Network

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