Vijayadashami 2021 Special: इंगोरिया (बड़नगर)। बड़नगर तहसील के गांव चिकली में लंकेश का 200 वर्ष पुराना मंदिर है। यहां दशहरे पर रावण दहन नहीं बल्कि दशानन की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्र के नौ दिनों तक यहां के रहवासी मां देवी की उपासना आराधना करते हैं, परंतु दशहरे के दिन रावण को धूप हवन कर पूजा करते हैं। सभी समुदाय के लोग सार्वजनिक उत्सव एवं सामाजिक कार्यक्रमों में सहयोग के लिए भागीदारी करते हैं। यहां रावण का प्रतीक रूप से पुतला दहन करने की परंपरा नहीं है।

गांव की चौपाल पर रावण का मंदिर 200 वर्षों से लोग देखते आ रहे हैं। उज्जैन-बड़नगर मार्ग पर इंगोरिया के समीप इस गांव में पहले चौपाल पर रावण की मिट्टी की प्रतिमा बनी थी। गांव के वरिष्ठ भारतसिंह आंजना ने बताया कि 70 वर्ष पहले एक साल रावण की पूजा बंद कर दी थी तो उस साल गांव को प्राकृतिक आपदाओं एवं आगजनी का सामना करना पड़ा था। तब ग्रामवासियों ने चंदा एकत्रित कर चौपाल पर रावण की एक पक्की पाषाण प्रतिमा का निर्माण करवा दिया। चेती दशहरा पर चिकली में नवयुवक मंडल द्वारा मेले का आयोजन किया जाता है। ग्रामवासी विभिन्ना सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाते हैं।

51 या 101 नारियल चढ़ाने की परंपरा

मनौतियां पूर्ण होने पर लोग नारियल चढ़ाते हैं। दूर-दूर से लोग मनौतियां पूर्ण होने पर यहां आकर रावण की पूजा करते हैं। सरपंच अर्जुन मकवाना के मुताबिक रावण का यह मंदिर मध्यप्रदेश में तो प्रसिद्ध है, गुजरात, बांसवाड़ा, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के श्रद्धालु भी यहां आकर पूजा करते हैं। पूजा में रावण को 51 या 101 नारियल चढ़ाने की परंपरा है।

रावण का बन रहा नया मंदिर

वर्तमान में रावण के मंदिर का जीर्णोद्धार सभी के सहयोग से चल रहा है। मंदिर का कार्य करीब-करीब पूर्णता की ओर है। निर्माण समिति में हाकमसिंह आंजना, रामेश्वर आंजना, लालसिह आंजना, नागूलाल जाट, ईश्वरलाल व्यास, बहादुर आंजना, भारत आंजना, ब्रजबाला, मोतीराम आंजना एवं सचिव प्रेमसिंह आंजना शामिल हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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