-नगर में जगह-जगह किया कृष्ण बारात का स्वागत, बग्घी में सवार होकर पंडाल में पहुंचे श्रीकृष्ण

कालापीपल मंडी (नईदुनिया न्यूज)। प्रेम भक्ति के समक्ष अभिमानी ज्ञान भी फीका है। प्रेम से भगवान को अपना बनाया जा सकता है। कृष्ण के मथुरा जाने के बाद विरह में गोपियों को कृष्ण नाम का ही सहारा था। उद्घव ने गोपियों को अपने अभिमानी ज्ञान से समझाना चाहा, लेकिन गोपियों के कृष्ण प्रेम के सामने उद्घव को नतमस्तक होना पड़ा। प्रेम के आगे उद्घव का ज्ञान भी फीका पड़ गया। जिनका केवल नाम लिखने से पत्थर तैर जाते हैं उनको हृदय से याद कर लेंगे तो जीवन तर जाएगा।

यह बात पंडित नरेन्द्र नागर ने हनुमान मंदिर के सामने चल रही सात दिवसीय भागवत कथा के दौरान बुधवार को कही। कथा के दौरान कृष्ण-रूक्मणि विवाह प्रसंग पर पंडाल में उत्सवी माहौल था। भगवान कृष्ण की बरात श्रीराम मंदिर से प्रारंभ हुई। बग्घी पर भगवान कृष्ण एवं रुक्मणि सवार थे। आगे घुड़सवार युवक धर्म ध्वजा लिए हुए चल रहे थे। बैंड पर बज रहे भजनों पर भक्त नृत्य कर रहे थे। नगर में जगह-जगह बरात का स्वल्पाहार से स्वागत किया गया। नागरिकों ने भगवान कृष्ण की पूजा की। नगर के मुख्य मार्गो से होती हुई बरात कथा पंडाल पहुंची। भक्तों ने पुष्प वर्षा कर अगवानी की। भक्ति गीतों पर महिलाओं ने नृत्य करते हुए बधाई गीत गाए।

इस अवसर पर पं. नागर ने कहा कि जीवन में हमेशा धन्यवाद का भाव बनाए रखें। हमेशा संतों का सत्कार करें क्योंकि जैसा संग रहेगा जीवन में वैसा ही रंग रहेगा। भगवान का प्रतिदिन स्मरण करना चाहिए। जो व्यक्ति प्रभु नाम का स्मरण नहीं करता है वह मानव जीवन में मृत व्यक्ति के समान है। माता-पिता, सास-ससुर की सेवा करें जीवन में यही सच्चा पुण्य है। रूक्मणी ने देवी मंदिर में जाकर भगवान कृष्ण को पति के रूप में मांगा। उन्हें कृष्ण भक्ति का फल भी प्राप्त हुआ। भगवान कृष्ण ने रुक्मिण के साथ विवाह किया। कथा के दौरान बुधवार को पंडाल भक्तों से भरा हुआ था। भागवत ग्रंथ के साथ भगवान कृष्ण एवं रूक्मणि की आरती की गई। प्रभु को लगाया भोग प्रसाद भक्तों में वितरित किया गया।

फोटो केप्शन-

26 केपीएम- 01 कालापीपल में कथा पंडाल में प्रवेश करते हुए कृष्ण एवं रुक्मणि।

Posted By: Nai Dunia News Network