शोभायात्रा के साथ हुई भागवत कथा की पूर्णाहुति

मोरटा केवड़ी (नईदुनिया न्यूज)। राधा कृष्ण मंदिर के प्रांगण में चल रही भागवत कथा के सातवें दिन पंडित सज्जन शर्मा ने कृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता के बीच में अगाध प्रेम था। सुदामा गरीब थे, वे अपनी पत्नी सुशीला के बार-बार आग्रह करने पर पत्नी का कहना मान करके तीन मुट्ठी चावल लेकर द्वारका की ओर प्रस्थान कर गए। जब द्वारकाधीश को पता चला कि मेरा बचपन का मित्र सुदामा मुझसे मिलने आया है तो सर्वस्व त्याग करके नंगे पैर ही प्रभु ने अपने महल से सुदामा से मिलने के लिए दौड़ लगा दी। यही सच्ची मित्रता का प्रमाण है। मित्रता में गरीब और धनवान नहीं देखा जाता है। परंतु सच्चा मित्र वही है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने मित्र का साथ ना छोड़े। जब सुदामा ने द्वारकाधीश से अपने घर जाने की आज्ञा मांगी तो उन्होंने कह दिया कि मित्र आज से तुम निर्धन नहीं संसार के सबसे बड़े धनवान व्यक्ति हो और विश्वकर्मा को आज्ञा दे करके सुदामापुरी का निर्माण करा दिया। इधर सुदामा जब अपने घर को आए तो झोपड़ी को महल में परिवर्तन हो कर के देखकर आश्चर्यचकित हो गए। जीवन का सार है कभी भी मनुष्य को अपने धन बल पर घमंड नहीं करना चाहिए। क्योंकि यहां तो एक परमात्मा की दी हुई परछाई है कभी भी नष्ट हो सकती है। इधर राजा परीक्षित ने सात दिन तक भागवत कथा का श्रवण किया और उसके उपरांत भगवान द्वारकाधीश से वरदान लेकर कर मोक्ष को प्राप्त हुए। मनुष्य को चाहिए कि वह अपने जीवन को भगवान के प्रति समर्पित करें क्योंकि भगवान ही अंत समय में मनुष्य का सच्चा साथी रहता है।

प्रमुख मार्गों से निकाली गई शोभायात्रा

भागवत कथा के समापन के अवसर पर राधा कृष्ण मंदिर के प्रांगण से प्रारंभ हुई शोभायात्रा ग्राम के विभिन्ना मार्गो से होकर निकली। प्रभु कृष्ण के भजनों की धुन में हर कोई थिरकता नजर आया। अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो...मैंने मोहन को बुलाया है वो आता होगा...भजनों की धुनो पर श्रद्धालुओं द्वारा खूब नृत्य किया गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local