संक्रमितों के बीच स्वास्थ्य सेवा करते हारे जिंदगी से जंग

आगर-मालवा (नईदुनिया न्यूज)। स्वास्थ्य विभाग में नगरीय क्षेत्र आगर के पर्यवेक्षक आभूषण पाल का निधन कोरोना संक्रमण से बुधवार देर रात उपचार के दौरान अमलतास हास्पिटल देवास में हो गया। वे 49 वर्ष के थे। वर्ष 2020 में संक्रमण के आरंभ से लेकर अप्रैल 2021 के अंतिम सप्ताह तक कोरोना योद्धा के रूप में संक्रमित क्षेत्रों में टीम के साथ पहुंचकर गाइड लाइन अनुसार टीम लीडर के रूप में संक्रमितों के घर-घर सेवाएं देते रहे। वे राज्य कर्मचारी संघ के जिला सचिव थे। निधन पर स्वास्थ्य विभाग एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी कर्मचारियों ने शोक छा गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार विभागीय नियमानुसार सभी प्रकार की सहायता के साथ ही शासन द्वारा घोषित 50 लाख रुपये की सहायता भी मिलेगी।

आभूषण पाल मूलरूप से उज्जैन के निवासी होकर स्वास्थ्य विभाग में स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पद पर 1999 में नियुक्त हुए थे। आगर में 15 फरवरी 2011 को स्वास्थ्य पर्यवेक्षक के रूप में पदस्थ हुए। तब से निरंतर आगर में ही सेवारत रहे। परिवार में पत्नी व एक बेटा,बेटी है। क्रिश्चियन धर्माववलंबी होकर पाल इस समाज की धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। राज्य कर्मचारी संघ के जिला सचिव रहते हुए विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की समस्याओं के निदान और आंदोलनों में भी अग्रणी थे। कई वर्षो से किडनी व शुगर से ग्रसित होने के बावजूद पाल ने मार्च 2020 में कोरोना संक्रमण के शुरू होने के साथ विभाग के मैदानी कार्यो का दायित्व पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ निभाया। संक्रमितों के कंटेनमेंट एरिया में घर-घर जाकर टीम के साथ स्वास्थ्य सर्वे करने और संक्रमितों को दवाइयों की किट देते हुए समझाइश का काम भी करते रहे। यह कार्य दूसरी लहर के दौरान अप्रैल अंतिम सप्ताह में संक्रमण की चपेट में आने के पूर्व दिवस तक वे करते रहे। उनके निकटस्थ साथी एवं राज्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष सत्यप्रकाश क्षोत्रिय ने बताया कि उनका कोरोना टेस्ट 26 अप्रैल को जिला अस्पताल में कराया और उसी दिन भर्ती हो गए। इस बीच उनका टर्न डायलिसिस कराने का था। संक्रमितों की डायलिसिस यहां के अस्पताल में नही की जा सकती है। ऐसे में यहां से 2 मई को उन्हें देवास रेफर करना पड़ा। बुधवार रात वहां के अस्पताल में आक्सीजन की दिक्कत की जानकारी फोन पर उन्होंने दी। परिचित संपर्क सूत्रों की सहायता से आक्सीजन भी वहां उपलब्ध करा दी गई, किंतु रात करीब 1.45 बजे उनका निधन हो गया। क्षोत्रिय ने बताया कि कोरोना योद्घा के रूप में काम करने वाले इस साथी को 11 वर्षो में आगर में मांग करने के बावजूद सरकारी क्वार्टर नहीं मिल पाया। करीब छह माह पूर्व से अस्पताल में भी उनसे अन्य व्यक्तियों की तरह डायलिसिस का शुल्क वसूला जाने लगा था।

शासन के नियमानुसार मृत्यु के तत्काल बाद दी जाने वाली 50 हजार रुपये की सहायता राशि मंजूर कर दी गई है। अन्य क्लेम भी जल्दी ही दिए जाएंगे। कोरोना ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने की दशा में शासन द्वारा घोषित 50 लाख रुपये की सहायता दिलाने के लिए नियमानुसार कार्रवाई करते हुए यह राशि भी दिलवाई जाएगी।

-डॉ. एसएस मालवीय, सीएमएचओ जिला आगर

Posted By: Nai Dunia News Network

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