शाजापुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कर्नाटक में भारी बारिश के असर से शाजापुर में प्याज के दामों में जैसे आग लग गई है। यहां थोक में ही प्याज के दाम 18 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जबकि खेरची में यह 20 से 25 रुपए किलो तक बिक रहा है। ऐसे में आमजनों को महंगा प्याज खाने को मिल रहा है। व्यापारियों की माने तो भारी बारिश के असर से कर्नाटक में प्याज की फसल को खासा नुकसान पहुंचा। वहां से यहां पर प्याज नहीं आ पा रहा है। अन्य प्रदेशों से भी आवक थम गई है।

शाजापुर जिला संतरा, आलू व प्याज जैसे फल व सब्जियों के उत्पादन में अपनी अलग पहचान बना चुका है। पारंपरिक खेती के साथ अब उद्यानिकी खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ा है। बारिश से जिले में इस बार सात हजार हेक्टेयर से अधिक में प्याज की बुआई की गई थी, लेकि न सीजन के समय प्याज के दाम औंधे मुंह लुढ़कने लगे। प्याज 50 पैसे से छह रुपए किलो तक बिकने लगा, लेकि न इसके बाद मुख्यमंत्री प्याज प्रोत्साहन योजना में सरकारी खरीदी शुरू की गई।

जून में चली मुख्यमंत्री प्याज प्रोत्साहन योजना के लिए बड़ी संख्या में कि सानों ने पंजीयन करा लिए थे। समर्थन मूल्य आठ रुपए किलो तय किया गया। शाजापुर, शुजालपुर, पोलायकलां, कालापीपल एवं मोहन बड़ोदिया को कें द्र बनाकर खरीदी की गई। कि सानों ने सीजन में 4721 किसानों ने दो लाख छह हजार क्विंटल प्याज बेचा किंतु खरीदी का यह आंकड़ा पिछले साल से कम रहा, क्योंकि गत वर्ष जिले में चार लाख 65 हजार क्विंटल से अधिक प्याज की खरीदी कर ली गई थी।

खरीदे गए प्याज को व्यापारियों ने ट्रकों में लोड़ करके यूपी, बिहार, दिल्ली सहित अन्य प्रांतों में भेजा। कई कि सानों ने प्याज को दाम बढ़ने की संभावना के चलते रोक लिया था लेकि न इसके बाद प्याज के दाम कु छ दिनों पहले तक एक से 13 रुपए किलो तक चलते रहे।

कुछ इसी तरह के दाम सरकारी खरीदी में भी रहे थे। इसके बाद दाम सामान्य ही चल रहे थे किंतु अगस्त माह के मध्य से दाम फिर बढ़ने लगे हैं। इससे यह आमजनों की पहुंच से दूर होने लगा है। सोमवार को टंकी चौराहा स्थित थोक फल-सब्जी मंडी में पांच हजार कट्टे की आवक रही। अच्छी क्वालिटी का प्याज चार से 18 रुपए किलो तक बिक गया। उल्लेखनीय है कि एक कट्टे में 40 से 50 किलो तक प्याज रहती है।

भंडारण क्षमता की की कमी

जिले में बड़े पैमाने पर प्याज की बुआई व उत्पादन लिया जाता है। भंडारण की व्यवस्था नहीं होने से हर साल काफी मात्रा में प्याज सड़ने से फेंकना पड़ता है। वहीं वर्षाकाल की शुरूआत में कम दाम पर भी कि सानों को प्याज बेचना पड़ता है। इसका प्रमुख कारण प्याज भंडार गृह की कमी होना भी है, क्योंकि प्याज फसल को काफी देख-रेख की आवश्यकता होती है। बारिश में हवा व नमी लगने पर यह तेजी से खराब होती है। चूंकि अधिकांश कि सान अपनी प्याज पहले ही बेच चुके हैं वहीं अन्य प्रदेशों में प्याज की फसल खराब हुई है। ऐसे में डिमांड ज्यादा व आवक कम होने से दाम में बढ़ोतरी हो रही है।

जल्द सामान्य होगी स्थिति

मंडी व्यापारी गौरीशंकर राठौर बताते हैं कि कर्नाटक में ज्यादा बारिश से प्याज फसल को नुकसान हुआ है। इसके चलते वहां प्याज की डिमांड बढ़ गई और प्याज के दाम में इजाफा हुआ। वहां से यहां पर प्याज भी नहीं आ रहा है। इससे खपत व आपूर्ति में अंतर आया और दाम बढ़ गए हैं। अन्य प्रदेशों से भी प्याज की आवक थमी हुई है। बारिश होने के बाद प्याज फिर से शाजापुर मंडियों में आएगा और दाम में गिरावट हो जाएगी।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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