Shajapur News: शाजापुर। बारिश की बार-बार हो रही खेंच के चलते परेशान किसानों के समक्ष अब नई मुसीबत सामने आ खड़ी हुई है, दरअसल, सोयाबीन में कीट इल्ली का प्रकोप दिखाई देने लगा है। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा खेतों में किए भ्रमण के दौरान इल्लियां नजर आई हैं। ऐसे में कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। किसानों से अपील की गई है कि अभी इल्लियों का प्रकोप प्राथमिक स्तर पर है, इसलिए इसकी रोकथाम आसानी से हो जाएगी। यदि रोकथाम नहीं की तो यह इल्लियां सोयाबीन को खासा नुकसान पहुंचा सकती हैं।

जुलाई आधे से ज्यादा बीत चुका है। इन दिनों फसलें करीब एक माह तक की होने को आई हैं। जिले में दो लाख 85 हजार हेक्टेयर में बुवाई प्रस्तावित है। हालांकि बारिश की खेंच के चलते कुछ जगहों पर बुवाई अभी नहीं हो पाई है, लेकिन अधिकांश जगह फसलों की बुवाई होने के बाद फसलें खेतों में नजर आ रही है। सबसे ज्यादा बुवाई सोयाबीन फसल की ही की गई है। इस पूरे माह बारिश की खेंच ज्यादा हो रही है। बीच-बीच में रुक रुककर कुछ देर बारिश हो रही है। इसके चलते सोयाबीन की फसल फिलहाल ठीक है। लेकिन सोयाबीन की इस फसल पर अब कीट व्याधियों का प्रकोप दिखाई देने लगा है।

पत्तियां व तने को पहुंचाती है नुकसान

कृषि वैज्ञानिक डॉ. मुकेशसिंह ने जिले के ग्राम जामनेर में कृषक गोरेलाल के यहां पहुंचे तो उनके खेतों में इल्ली की उपस्थिति दिखी। डॉ. सिंह को यहां के अलावा अन्य जगहों पर भी इल्लियां दिखाई दी। उन्होंने किसानों से कहा कि वर्तमान में कट इल्ली दिखाई दे रही है। यह इल्ली सोयाबीन की पत्तियों व तने को नुकसान पहुंचाती है। इसका असर सोयाबीन की बुवाई के 25 दिन बाद होने लगता है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में उमस भरे शुष्क माहौल में यह इल्ली और भी ज्यादा सक्रिय हो जाती है। उन्होंने कहा कि इस इल्ली की मादा कीट का भी प्रकोप दिखाई दे रहा है। इसलिए किसानों को चाहिए की वह खेतों की निगरानी करें, इल्लियों की उपस्थिति, पौधों पर इनका असर दिखाई दे तो रोकथाम के उपाय करें। यदि रोकथाम नहीं की गई तो सोयाबीन फसल के उत्पादन पर विपरित प्रभाव पड़ता है।

यह करें उपाय

कृषि वैज्ञानिक डॉ. सिह ने किसानों को सलाह दी है कि जिन किसान भाइयों की सोयाबीन की फसल 25 दिन की हो गई है उसमें पत्ती काटने वाले और कट इल्ली कीड़े लगने की संभावना है। जहां भी ऐसा हो वहां पर किसान प्रोपेनोफॉस 40 प्रतिशत और साइपरमैथरीन 4 प्रतिशत की 35 एमएल की मात्रा मिलाकर प्रति पंप के मान से छिड़काव करें और एक बीघा में कम से कम 6 पंप पानी मिलाकर छिड़काव करें।

Posted By: Nai Dunia News Network

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