- एडीएम कोर्ट से हुआ फै सला, खाद्य एवं औषधी प्रशासन विभाग ने लिए थे सैंपल

शाजापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिले में अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना एकसाथ होने का पहला निर्णय एडीएम कोर्ट से आया है। घी, बर्फी, शहद जैसी खाद्य सामग्री के सैंपल फे ल होने के मामले में सभी में मिलाकर कु ल दो लाख 40 हजार रुपए का जुर्माना कि या गया है। सैंपल फे ल होने के मामले में तगड़ा जुर्माना लगने से अब व्यापारियों सहित निर्माता कंपनियां भी गंभीर नजर आएंगी।

जिले में खाद्य एवं औषधी प्रशासन विभाग के नियम के अनुसार चार हजार से ज्यादा व्यवसायी हैं। इनकी दुकानों आदि पर नियमित जांच व सैंपल लेने के लिए अमला जाता है। हालांकि , जिले में बिकने वाले खाद्य एवं पेय पदार्थों की जांच व गुणवत्ता के लिए जिम्मा महज दो खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के कांधों पर है। दुकानों के मान से यह संख्या कम है। फिर भी अधिकारियों द्वारा जहां तक हो सके , भ्रमण कर सैंपलिंग की जाती है। अधिकारियों द्वारा लिए गए सैंपल जांच के लिए राज्य प्रयोगशाला भेजे जाते हैं। जहां से आई रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। सैंपल पास हुआ तो ठीक लेकि न फे ल हुआ तो नियमानुसार कोर्ट या एडीएम कोर्ट में प्रकरण प्रस्तुत कि या जाता है। जहां से मामले में निर्णय सुनाए जाते हैं।

इस तरह हुए जुर्माने

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के दौरान लिए गए सैंपलों में पांच सैंपल फे ल हो जाने पर मामला एडीएम कोर्ट में चल रहा था। प्रकरणों की सुनवाई करते हुए एडीएम मंजूषा राय ने जुर्माने कि ए। खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरके कांबले एवं एसएस खत्री ने बताया मोहन बड़ोदिया से लिए गए एक डेयरी पावडर के सैंपल के मिस ब्रांडेड होने से संबंधितों पर कु ल 60 हजार का जुर्माना कि या गया। इसी तरह शाजापुर के कि ला रोड पर खुले घी के नमूने के अवमानक निकलने पर 15 हजार रुपए का जुर्माना हुआ। शुजालपुर मंडी क्षेत्र से लिए गए स्पेशल बर्फी के सैंपल के मिस ब्रांडेड होने पर संबंधितों पर 20-20 हजार रुपए यानी कु ल 40 हजार रुपए का जुर्माना कि या गया। एक अन्य प्रकरण जिसमें नईसड़क स्थित दुकान से शहद एवं पाचक अनार दाना गोली के सैंपल के मिस ब्रांडेड होने के मामले में संबंधितों पर कु ल एक लाख 25 हजार का जुर्माना कि या गया है। इस तरह सभी मामलों में कु ल दो लाख 40 हजार का जुर्माना हुआ है।

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गुणवत्ता का रखें ध्यान, दस्तावेज नहीं तो भी सजा व जुर्माने का प्रावधान

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि व्यवसायी खाद्य एवं पेय पदार्थों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग, स्वच्छता आदि को लेकर ध्यान दें। यदि नियमानुसार कि सी कमी के कारण सैंपल फे ल होता है तो जुर्माना व सजा तक हो सकती है। वहीं जो भी व्यवसायी खाद्य एवं पेय पदार्थों से संबंधित व्यवसाय कर रहे हैं उन्हें फू ड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत पंजीयन व लाइसेंस लेना अनिवार्य है। अब तक जिले में चार हजार से ज्यादा रजिस्ट्रेशन व लाइसेंस बनाए जा चुके हैं। इस एक्ट के तहत कार्रवाई हो तो सजा व जुर्माने दोनों का प्रवधान है। लाइसेंस नहीं पाए जाने पर छह माह तक की सजा और एक लाख रुपए तक का जुर्माना और रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर अधिकतम 25 हजार रुपए का जुर्माने का प्रावधान है। ऐसे में खाद्य एवं औषधी प्रशासन विभाग द्वारा जिले में खाद्य एवं पेय पदार्थों से जुड़े विक्रेता, निर्माता आदि सभी से लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन कराने के लिए जोर दे रहा है। उल्लेखनीय है कि सीजनल व्यवसाय करने वाले व्यवसायियों के पास इन दस्तावेजों को लेकर जागरुकता कम रहती है।

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