आगर मालवा। सुदामा के आने की खबर पाकर श्रीकृष्ण दौड़ते हुए दरवाजे तक गए थे। पानी परात को हाथ छूवो नाही, नैनन के जल से पग धोये, योगेश्वर श्री कृष्ण अपने बाल सखा सुदामा की आवभगत में इतने विभोर हो गए के द्वारका के नाथ हाथ जोड़कर और अंग लिपटाकर जल भरे नेत्रों से सुदामा का हाल चाल पूछने लगे। इस प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि मित्रता में धन दौलत आड़े नहीं आती।

यह बात विवेकानंद कॉलोनी स्थित विश्वेश्वर महादेव मंदिर में चल रही भागवत कथा के अंतिम दिन कथावाचक पं. बांके बिहारी महाराज ने की। बांके बिहारी महाराज ने कहा कि स्व दामा यस्य सः सुदामा अर्थात अपनी इंद्रियों का दमन कर ले वही सुदामा हैं। श्री कृष्ण भक्त वत्सल हैं सभी के दिलों में विहार करते हैं जरूरत हैं तो सिर्फ शुद्घ ह््रदय से उन्हें पहचानने की हैं।

कथा के दौरान बीच-बीच में मण्डली द्वारा भजन की सुंदर प्रस्तुति भी दी गई। सुदामा चरित्र की कथा सुनकर एवं कृष्ण एवं सुदामा के मिलन की झांकी का दृष्य देख पण्डाल में मौजूद सभी भक्तगण भाव विभोर हो गए।

अद्भुत झांकी ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया और एक स्वर में राधे-कृष्ण के जयकारों से पण्डाल गुंजायमान हो उठा। सुदामा की मित्रता भगवान के साथ निःस्वार्थ थी, उन्होने कभी उनसे सुख साधन या आर्थिक लाभ प्राप्त करने की कामना नहीं की। लेकिन सुदामा की पत्नी द्वारा पोटली में भेजे गए चावलों ने भगवान श्री कृष्ण से सारी हकीकत कह दी और प्रभु ने बिन मांगे ही सुदामा को सबकुछ प्रदान कर दिया।

माता-पिता और गुरू भक्ति से

पापों का नाश होता हैः सप्ताह भर की कथा का सारांश में प्रवचन करते हुए बांके बिहारी महाराज ने कहा कि जो लोग बाकी दिन की कथा नहीं सुन पाए हैं उन्हें इस कथा का श्रवण करने से पूरी कथा सुनने का पुण्य लाभ प्राप्त हो सकता हैं। पापों का नाश करने के लिए भगवान धरती पर अवतार लेते हैं। धरती पर आने के बाद भगवान भी गुरु की भक्ति करते हैं। सधो गुरु के आशीर्वाद से जीवन धन्य हो जाता हैं। कलयुग में माता-पिता और गुरु भक्ति करने से पापों का नाश होता हैं। महाराज ने कहा कि जब सत्संग में जाएं तो सिर्फ कान न खोलें बल्कि आंख भी खोल कर रखें। मनुष्य को आत्मचिंतन और आत्म साक्षात्कार की आवश्यकता हैं। कथा केवल सुनने के लिए नहीं है बल्कि इसे अपने जीवन में उतारें इसका अनुसरण करें।

चल समारोह निकलाः कथा समापन के बाद भव्य चल समारोह निकला। जिसमें कथा वाचक बांके बिहारी महाराज को बग्घी में विराजित किया गया था। वहीं यजमान किशोर कुलथिया सिर पर भागवत लेकर चल रहे थे। महिलाएं गरबा करती हुई चल समारोह में शामिल हुई। कथा समापन भण्डारे का आयोजन भी किया गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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