शाजापुर। फागुन के महीने में जंगल की सुंदरता को चार चांद लगाने वाले पलाश या ढाक को हमारे मालवा में खांकरी के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि दक्षिण यात्रा पर जाते समय मुगल शासक शाहजहां को इस क्षेत्र के वनों की सुंदरता ने प्रभावित किया। खांकरी खेड़ा के नाम वाले इस क्षेत्र को अपने नाम की छाप दे दी और शाहजहांपुर नाम मिला। सन 1732 में इसे ग्वालियर स्टेट की छत्रछाया मिली और 1905 में जिले के रूप में जन्म लेने पर संशोधित नाम शाजापुर मिला। सघन वनों में कल-कल बहने वाली पार्वती, नेवज, कालीसिंध, लखुन्दर और चीलर नदियों की सांसें अब टूटने लगी हैं। हमने इन नदियों में बच्चों और नौजवानों को जोशो-खरोश से कूदते और तैरते देखा है। अब ये प्रदूषित और संकुचित नदियां अपनी शुद्धता और चपलता खो चुकी हैं। खैर, पर्यावरण प्रदूषण का खामियाजा सबके साथ हमें भी भुगतना पड़ा। नगरपालिका शाजापुर के द्वारा शहर के बीच निकली चीलर नदी के निकट एक सुंदर उद्यान का निर्माण तो किया है परन्तु चीलर नदी के पानी की दुर्गंध उद्यान की सुंदरता पर भारी पड़ रही है।

मीठी बोली और मीठे पानीवाला शाजापुर कुछ परंपराओं और क्षेत्रों में अनूठा भी है। हर साल कार्तिक महीने की दशमी को कंस वधोत्सव को त्यौहार के रूप में लगभग 270 वर्षों से भारत में मथुरा के अलावा केवल शाजापुर में ही इसे मनाया जाता है। कंस वधोत्सव की रात्रि में कंस, कृष्ण और राक्षसों के बीच होने वाले तात्कालिक परिस्थिति के तुकबंदी वाले संवाद और वाकयुद्ध सुनने के लिए लोग रातभर खड़े रहते हैं।

राष्ट्रकवि बालकृष्ण शर्मा नवीन और प्रभाग चन्द्र शर्मा के प्रयासों से चीलर बांध और रेलवे लाइन नहीं मिलती तो शाजापुर समृद्धि के दो कदम भी नहीं चल पाता। पुरानी धरोहरों को सहेजने की बहुत आवश्यकता है। नगर के पत्रकारों की कलम की स्याही सूख गई परन्तु जुलाई 2013 में बिजली गिरने से टूटी किले की दीवार न बन पाई इसका दुख न जाने कब दूर होगा।

शिक्षा के क्षेत्र में स्तर सुधारने के प्रयास में शाजापुर जिले को भी सात सीएम राइज स्कूलों की सौगात मिली है, ये खुशी की बात है परन्तु शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रपति और राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त शिक्षकों के अनुभवों का निश्शुल्क लाभ लिया जाए तो आधुनिक शिक्षा को दिशा मिल सकती है। शाजापुर में जनवरी से ट्रौफिक सिग्नल सिस्टम चालू हुआ। हम शाजापुर वासी अभी यह भी नहीं जानते हैं कि सड़क पर बनी काली सफेद पट्टिया (जेब्रा क्रॉसिंग) पैदल यात्रियों के लिए होती है, उस जेब्रा क्रॉसिंग पर सभी वहां बाहन चालक खड़े रहते हैं। सिग्नल चालू होने के पूर्व ही अपना वाहन चला देते हैं।

यह वर्ष रक्तदान के क्षेत्र में शाजापुर जिले का नाम विश्व पटल पर गोल्डन बुक आफ वर्ल्‌ड रिकार्ड में लिखवाने के लिए भी याद रहेगा। इस उपलब्धि पर जिले के कलेक्टर दिनेश जैन और डिस्ट्रिक्ट ब्लड ट्रांस्फ्यूशन अधिकारी डॉ. एसडी जायसवाल को गोल्डन बुक आफ वलर्ड रिकार्ड की ओर से पुरुस्कृत किया गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close