-नामांतरण व आवास योजना के हजारों हितग्राही हो रहे परेशान

आगर-मालवा (नईदुनिया न्यूज)। नगर पालिका परिषद का निर्वाचित बोर्ड करीब सालभर से भंग पड़ा है। इसी बीच कोविड संक्रमण और एक के बाद एक राजस्व एवं लिपिक वर्ग के वरिष्ठ कर्मचारियों के तबादले और सीएमओ की अदला-बदली हुई। इस वजह से आम जनता से जुड़े नामांतरण और प्रधानमंत्री आवास योजना के हजारो हितग्राही परेशान हैं, वहीं अंधोसरंचनागत विकास कार्य भी ठप पड़े हैं। गत माह हुए आगर विधानसभा के हुए उपचुनाव के दौरान भाजपा व कांग्रेस के स्थानीय नेताओं को जनसंपर्क में परेशान हितग्राहियों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। इधर मार्च 2020 से प्रदेश में भाजपा की सरकार होने से इसका खामियाजा चुनाव में भाजपा को आगर नगर से उठाना पड़ा।

लगातार हुए तबादले

आगर की इस नगर पालिका से पिछले करीब एक डेढ़ वर्ष से एक के बाद एक स्थायी अनुभवी और वरिष्ठ कर्मचारियों के तबादले होते रहे। इनके स्थान पर इक्का-दुक्का कर्मचारी ही आ पाए। राजस्व शाखा से अशोक पांचाल, चिंतामण व्यास, गौरव शर्मा, रामचंद्र सिंदल, अरुण शर्मा, ओपी नागर एवं वरिष्ठ लिपिक जसवंत नरवाल, उपयंत्री अजीत तिवारी के तबादले यहां से हुए। चिंतामण व्यास को आगर में स्वच्छता प्रभारी बना रखा है। इन्हें सोयतकलां नगर परिषद के सीएमओ का अतिरिक्त प्रभारी भी विगत कुछ महीनो से दे दिया है। इधर यहां पदस्थ अनुभवी एवं वरिष्ठ सीएमओ सीएस जाट का तबादला तराना और तराना से यहां बन्नेसिंह सोलंकी को पदस्थ करीब दो माह पूर्व कर दिया गया है। नवपदस्थ सीएमओ वरिष्ठ और स्थायी कर्मचारियों के अभाव एवं यहां चले आ रहे कामकाज के ढर्रे को समझ ही नहीं पा रहे हैं।आम लोग और मीडिया किसी भी विषय को लेकर इन्हें फोन लगाते हैं तो अधिकतर इनका फोन नहीं लगता और लगता है तो इनका जवाब होता है कि 'अभी मैं तो नया हूं मुझे पूरी जानकारी ही नहीं है।'

नामांतरण के 700 प्रकरण पेडिंग

दिसंबर 2019 के अंत में परिषद का कार्यकाल समाप्त हुआ। इसके 3-4 माह पूर्व से लेकर बाद की समयावधि में नामांतरण के प्रकरण 700 से अधिक नगर पालिका में पेंडिंग हो गए। कोरोना में नगर पालिका अमले की व्यस्तता पूरे लॉकडाउन के दौरान रहने और यहां से कर्मचारियों के लगातार तबादले, उपचुनाव आदि के चलते प्रकरणों में आवश्यक खानापूर्ति नहीं हो सकी। भाजपा के पूर्व पार्षद अशोक प्रजापत ने बताया कि इस बीच जो प्रकरण तैयार हुए, उन्हें इस नपा के लिए नियुक्त प्रशासक कलेक्टर के यहां भेजे। वहां से भी व्यस्तताओं के चलते प्रकरणों की अंतिम स्वीकृति नहीं हो पाई। हाल ही में अब जाकर गत दिनों मात्र 17 प्रकरण प्रशासन कार्यालय से स्वीकृत होकर आए हैं। प्रजापत ने बताया कि इसके पहले भी कई प्रकरण पेंडिंग हैं। प्रजापत का कहना है कि नामांतरण का कार्य आवेदक के लिए अति महत्वपूर्ण होता है क्योंकि मकान, आवासीय भूखण्ड की खरीदी-बिक्री और वसीयत एवं बंटवारे के आधार पर जब तक नामांतरण नगर पालिका में नहीं होता आवेदक न तो मकान बना सकता है और न ही उसे बैंकिंग संस्था से लोन मिल सकता है। इसी प्रकार दुकानों के नामांतरण प्रकरण भी सौदे के अंतर्गत पक्षकारों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

आवास के हितग्राही 5 साल से परेशान

इस नगर के लिए प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना अंतर्गत पहली डीपीआर 716 हितग्राहियों की वर्ष स्वीकृत हुई, दूसरी डीपीआर 1554 हितग्राहियों की 2019 स्वीकृत हुई। इसमें से 732 हितगा्रहियों के लिए पहली किस्त एक-एक लाख रुपये की शासन ने नगर पालिका आगर को आबंटित कर दी। इधर स्थानीय नेताओं द्वारा चयनित हितग्राहियों की अपात्रता को लेकर शिकवा-शिकायत का दौर आरंभ हुआ। जिसके चलते प्रशासन के निर्देश हितग्राहियों की पात्रता संबंधित जांच-पड़ताल का सिलसिला शुरू हुआ। सितंबर अंतिम सप्ताह में चुनाव आचार संहिता लगने के पूर्व 418 हितग्राहियों के खातों में राशि डाली गई। फिर शिकायत हुई और दूसरे ही दिन सीएमओ ने इस राशि के आहरण पर रोक लगा दी तथा प्रशासन के निर्देश पर फिर इन 418 हिातग्रहियों की पात्रता की जांच नगर पालिका के राजस्व एवं निर्माण विभाग केअधिकारियों से कराई गई। इसके बाद जांच पूरी होने के साथ धीरे-धीरे होल्ड खातों से आहरण की रोक हटाई गई। जांच कार्य में शामिल नपा के निर्माण विभाग की उपयंत्री निधि पटेल ने बताया कि 50 हितग्राही अपात्र पाए गए हैं। इन्हें छोड़कर शेष ि हताग्रहियों के खातों से आहरण की रोक हटा दी गई है। आबंटन 732 हितग्राहियों के लिए 7 करोड़ 32 लाख मिला था। इनमें से 418 का चयन किया गया था। शेष हितग्राहियों की पात्रता की जांच जारी है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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