मनोज श्रीवास्तव। श्योपुर

श्योपुर जिले में जंगल को हराभरा करने और आदिवासियों को रोजगार दिलाने के लिए वनविभाग इस बार 6 लाख 25 हजार पौधे रोपने जा रहा है। इसमें नीम, शीशम, बरगद के अलावा औषधि वाले आंवला, छोला, महुआ, शतावर,तुलसी, सफेद मूसली, काली मूसली, पादुर पाटला, अधापुष्पी सहित अन्य पौधे रोपेंगे। सामान्य वन मंडल के मुताबिक पौधरोपण का काम बारिश के बाद जून के अंतिम सप्ताह तक किया जाएगा। जंगल में पौधों को कोई नुकसान नहीं हो इसके लिए वन समितियों को जिम्मेदारी दी है। यह समितियों पौधों की सुरक्षा कर उन्हें बड़ा करेंगी, इसके बाद इनसे मिलने वाली जड़ीबूटी आदि को चुनकर उन्हें वनविभाग के माध्यम से बाजार में बेचेंगी।

2680.588 वर्ग किलोमीटर में रोपे जाएंगे 6.25 लाख पौधे : यहां बता दें, कि जिले में जंगल का 2680.588 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 6666.609 वर्ग किमी में सामान्य वनमंडल और करीब 748.7618 वर्ग किलोमीटर एरिया में कूनो-पालपुर नेशनल पार्क है। सामान्य मंडल डीएफओ सुधांशु यादव के मुताबिक इस बार जंगल में सवा छह लाख पौधे रोपने का लक्ष्‌य हैं। इसमें नीम, छोला, तेंदू, शीशम, बबूल, शिशु, खैर, धो, आम, महुआ सहित अन्य प्रजातियों के पौधे रोपे जा रहे हैं।

पौधे रोपने से लेकर जड़ी-बूटी चुनने में मिलता है आदिवासियों को रोजगार : डीएफओ यादव के मुताबिक जिले में श्योपुर, कराहल, विजयपुर आदि क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है। इसमें 140 वन समिति सामान्य वनमंडल और 60 समिति कूनो नेशनल पार्क से जड़ी हैं। इन समितियों में अधिकांशतः आदिवासी परिवार ही जुड़े हैं। जंगल में पौधे लगाने के लिए मजदूरी के रूप में इन्हीं आदिवासियों को प्राथमिकता दी जाती है। साथ ही सुरक्षा का जिम्मा भी इन्हीं पर रहता है। वहीं बारिश के बाद जंगल से जड़ी-बूटी भी यही लोग लेकर आते हैं, जो वनसमितियों के माध्यम और सीधे व्यापारियों को जड़ी-बूटी बेचते हैं। ऐसे में वनविभाग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब डेढ़ लाख आदिवासियों को रोजगार मुहैया करा रहा है।

100 एकड़ में तैयार कर रहे औषधि वन : सामान्य वन मंडल कराहल क्षेत्र के पिपरानी गांव के पास 100 एकड़ जमीन में औषधि वन तैयार कर रहा है। यहां 14 हजार विभिन्ना औषधियों के पौधे रोपे जाएंगे। डीएफओ यादव के मुताबिक इस वन में अरणी अग्निमंथ, मौलसिरी, खीरनी, फेट्रा, कुटज, जंगली ककड़ी, भृंगराज, जंगली काला तिल, बेलगुदा, शंखपुष्पी, हरश्रृंगार सियारी, चीडगोंद, शंखकेसरी, खैरगोंद, छाबडागोंद, शहद, आंवला, बेरजड, इन्नााीपंचांग, तेंदुपत्ता, महुआ, अर्जुनछाल गोरकू, अमरवेल, लघु कंटकारी, रामदातौन, माकड़ तेंदू, जंगली कपास, पीला धतूरा आदि पौधे रोपे जा रहे हैं।

आदिवासियों की ऐसे बदलेगी आर्थिक स्थिति : डीएफओ यादव के मुताबिक आदिवासी समुदाय के लोग जंगल से कीमती जड़ी-बूटियों को सस्ते दामों में बेच देते हैं। इसलिए आदिवासियों को वन समिति व समूह से जोड़ रहे हैं, उन्हें बताएंगे कि जंगल से जो वह जड़ी-बूटी ला रहे हैं, उनकी बाजार में क्या कीमत है। आदिवासी लोग जंगल से जड़ी-बूटी चुनकर समूहों को देंगे। जड़ी-बूटी एकत्रित करने के लिए श्योपुर और कराहल में सेंटर बनाए गए हैं।

यह भी जड़ी-बूटियां औषधि वन में लगा रहे :

औषधीय नाम - वैज्ञानिक नाम - गुण

1. सफेद मूसली -क्लोरोफाइटम एसपी -रोग प्रतिरोधक, डायबिटीज व यौन रोग में उपयोगी

2.सतावर - अस्टैरेगस रेसिमोसस -रोग प्रतिरोधक

3.काली मूसली - कुरकुरिगो आर्चिडियस - रोग प्रतिरोधक, त्वचा विकार व पाचन संबंधी

4.जीवंती - लेप्टाडेनिया रेटीकुलाटा - संधि वात, नेत्र रोग, रक्त शुद्धि में उपयोगी

5.पादुर पाटला - स्टेरियोपरमम सुवावेलेंस - त्रिदोष नाशक, पथरी व ज्वर नाशक

6.उतर - डायमिया एक्सटेना - विषनाशक, त्रिदोष नाशक

7.अधापुष्पी - ट्राइटोडेस्मा इन्डिकम -सूजन निवारक, उपदंश, नेत्र रोग में उपयोगी

8. हृदय बीज - कार्डियोगपरमम हेलीकाकाबम -रक्त संचार, ज्वाइंट पेन में उपयोगी

9. इंद्रायण बड़ी -सिस्टेरूलस कोलोसाइंटस - सुगर, पीलिया, हाथी पांव, विष व कफ नाशक

10. घाव पत्ता- - अर्गेएरिया नेरबासा - सूजन, टॉनिक, चर्मरोग में उपयोगी

वर्जन :

इस बार जंगल में सवा छह लाख पौधे रोपे जा रहे हैं। इसमें छायादार-फलदार के अलावा औषधियुक्त भी हैं। पिपरानी के पास 100 एकड़ में औषधि वन तैयार कर रहे हैं। पौधरोपण से लेकर जड़ी-बूटी चुनने तक आदिवासी परिवारों को रोजगार मिलता है, जिससे निश्चित ही उनकी आर्थिक स्थिति सुधरती है।

सुधांशु यादव, डीएफओ सामान्य वनमंडल श्योपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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