Ayodhya Ram Mandir : हरिओम गौड़. श्योपुर। भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या में राममंदिर का निर्माण बुधवार से शुरू होगा। अवध में राम मंदिर की नींव असल में 1992 के जिस आंदोलन से पड़ी थी उसमें श्योपुर के जत्थे में श्योपुर जिले के बड़ौदा कस्बे के मुरारी चौरसिया और उनके दो मुस्लिम दोस्त मोहम्मद अब्दुल करीम व मोहम्मद हफीज खान भी शामिल थे।

इनकी टोली न सिर्फ पूरे आंदोलन में शरीक हुई बल्कि विवादित ढांचे की ईंट भी निशानी के तौर पर लाए जो मुरारी चौरसिया की दुकान में 28 साल से रखी है।

बड़ौदा में टेलर का काम करने वाले 50 वर्षीय मोहम्मद अब्दुल करीम उर्फ बंसल, 52 साल के मोहम्मद हफीज खान और उनके हमउम्र मुरारी चौरसिया 1992 के राममंदिर आंदोलन में श्योपुर के पूर्व विधायक सरदार गुलाब सिंह, रमाशंकर भारद्धाज के अलावा कैलाश नारायण गुप्ता, महावीर सिंह सिसोदिया, शंभूदयाल सुमन, पुरुषोत्तम चौरसिया, बद्री सोनी, रामरतन नागर भुखारी, शंभू सिंह कुशवाह, शंभूदयाल शर्मा सहित करीब 150 लोगों के साथ अयोध्या गए थे। जिले से दूसरा दल गया जिसमें पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय, दौलतराम गुप्ता, महेन्द्र जैन, सुरेश जैन आदि कई लोग थे।

सभी लोग तीन से चार दिन तक अयोध्या में रहे और ढांचे के विध्वंस के बाद ही वापस लौटकर आए थे। मोहम्मद करीम बड़ौदा में टेलर की दुकान चलाते हैं। मुरारी चौरसिया की बड़ौदा के मैन बाजार में बरगद के पेड़ के पास पान की दुकान है और मो. हफीज कई साल पहले राजस्थान के कोटा में शिफ्ट हो गए हैं।

बंदर ने पकड़ा गिरता हुआ भगवा झंडा

बड़ौदा के शंभूदयाल सुमन और रामप्रसाद सुमन बताते हैं कि जब विवादित ढांचे को हजारों की भीड़ गिरा रही थी तभी वहां एक हिस्सा ऐसा भी ढह गया जिस पर भगवा झंडा लगा हुआ था। इमारत के साथ झंडा भी गिरने लगा तब एक बंदर वहां आया और उसने भगवा झंडे को न सिर्फ पकड़ा बल्कि उसी जगह ढांचे में फिर से लहरा दिया। यह नजारा देखने के बाद वहां जय बजरंग बली के जयकारों से पूरा माहौल गूंजने लगा।

इनका कहना है

हां मैं भी अयोध्या गया था और राममंदिर के आंदोलन में शरीक भी हुआ था। महावीर सिसोदिया हमें लेकर गए थे। मैंने वह पूरा घटनाक्रम देखा है। बड़ौदा से हमारे साथ गए लोग भी निशानी के तौर पर ईंट लेकर आए।

-मोहम्मद अब्दुल करीम उर्फ बंसल

हम यहीं से प्रण करके गए थे कि भगवान राम की जन्मस्थली पर बने विवादित ढांचे को हटाकर वहां मंदिर के लिए जगह खाली करके ही लौटेंगे। जिस हिस्से को तोड़ा उसकी एक ईंट मैं लेकर आ गया जो, आज भी मेरे पास है।

-मुरारी चौरसिया, बड़ौदा निवासी, श्योपुर

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

ipl 2020
ipl 2020