- जंगल में छोड़ने जाने के बाद चीतों की अलग-अलग पहचान रहती है मुश्किल

-अफ्रीका में 20 साल से अपनाए जा रहे पैटर्न के आधार पर दे रहे प्रशिक्षण

Cheetah in MP: श्योपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नामीबिया से लाए गए चीतों को बड़े बाड़े में छोड़ने के साथ ही कूनो में इनकी पहचान को लेकर भी उलझन दूर की जा रही है। दरअसल चीतों को दूर से देखकर अलग-अलग पहचान करना आसान नहीं होता। चूकि चीता प्रोजेक्ट के अगले चरण में चीतों को स्वतंत्र रूप से खुले जंगल में छोड़ा जाना है इसलिए नामीबियाई विशेषज्ञ स्थानीय वन अधिकारियों को उनके शरीर पर निशान आदि से पहचान का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके लिए अफ्रीका में 20 साल से अपनाए जा रहे पैटर्न को आधार बनाया गया है।

कूनो नेशनल पार्क में पांच मादा और तीन नर चीता को पांच अलग-अलग बाड़ों में छोड़ गया है। दो चीता भाई आल्टन और फ्रेडी ही एक बाड़े में व तीन मादा चीता सबाना, सियाया और साशा को एक ही बाड़े में रखा है। सीमित दायरे से बाहर एक साथ खुले जंगल में छोड़े जाने पर चीतों को करीब से देखकर पहचान आसान नहीं है। ऐसे में कौन आल्टन है और कौन फ्रेडी, इसकी पहचान करना जरूरी है। अधिकारियों के अनुसार चीतों के गले में कालर आइडी से हर हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है, परंतु 24 घंटे में एक बार इन्हें खुली आंखों से भी देखा जाना जरूरी है। इसके लिए नामीबियाई विशेषज्ञ मिस्टर वाट और उनकी टीम कूनो में स्टाफ को प्रशिक्षण दे रहे हें।

बनावट और स्किन के आधार पर अंतर कर पाना मुश्किल: कूनो के सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने बतया कि बनावट और स्किन के आधार पर दो चीतों में अंतर करना मुश्किल होता है इसलिए चीता कंजर्वेशन फंड के प्रतिनिधि मिस्टर वाट प्रोजेक्ट चीता से जुड़े सदस्यों को इसकी जानकारी दे रहे हैं। जो आगे वन अधिकारी व अन्य अमले को इसका प्रशिक्षण देंगे। चीता के हाव भाव, पैर और उसकी एक्टिविटी से पहचान करना सिखाया जा रहा है। उसके हाव भाव से यह पता किया जाता है कि वह किस मनोस्थिति में है, उसके पास जाना कितना सुरक्षित है।

चेहरे, पूंछ पर अलग निशान से होगी पहचान

-नामीबियाई विशेषज्ञ के अनुसार चेहरे, शरीर और पूंछ के हिस्से से अफ्रीका में 20 साल से ज्यादा समय से चीतों की अलग-अलग पहचान की जा रही है। चेहरे और छाती पर निशान छोटे और करीब से पहचाने जा सकने वाले होते हैं, जबकि आंख से मुंह तक बनी काली पट्टी दूर से देखी जा सकती है। ये हर चीते में अलग होती है जिससे उनके चेहरे का भाव अलग दिखता है। शरीर पर काले रंग के निशान भी डीप गोल्ड से अलग-अलग तरह के होते हैं। पूंछ पर 5-6 पूरी काली रिंग और आधी रिंग होती है जो दोनों तरफ से दिखाई देती है। पूंछ के आखिरी छोर का रंग सफेद से काले रंग का होता है।

-नर चीता मादा की तुलना में बड़े होते हैं और उनके सिर भी बड़े होते हैं। चीते के शावकों के शरीर पर निशान सबसे पहले पैर, उसके बाद पूंछ और फिर पूरे शरीर पर दिखाई देते हैं। जो समय के साथ और चमकदार होते जाते हैं। चार हफ्ते की उम्र से ही चीतों की पहचान करना आसान हो जाता है।

Posted By: anil tomar

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