श्योपुर। (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाकर बसाए गए चीतों को सात दिन से ज्यादा हो गए और ऐसे में नए घर-नए माहौल में वे घुल-मिल गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अब क्वारंटाइन बाड़े से चीतों की नजर शिकार के लिए जंगल में अठखेलियां करते चीतलों पर भी दौड़ रही है। ये अच्छे संकेत हैं। अभी इन्हें ताजा मांस ही परोस कर दिया जा रहा है। खुद शिकार करने के लिए अभी इन्हें इंतजार ही करना पड़ेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर को कूनो नेशनल पार्क में चीते छोड़े थे। पांच मादा और 3 नर चीतों को विशेष रूप से तैयार दो बाड़ों में रखा गया है। इन पर निगाह रख रहे विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती एक दो दिन बाद ही चीते मस्ती के मूड में नजर आने लगे। कभी बाड़े में पेड़ की छांव में तो कभी एक-दूसरे से साथ अठखेलियां करते दिखे। अभी एक दिन छोड़ कर भोजन में भैंस का मांस दिया जा रहा है, लेकिन प्राकृतिक रूप से अब ये खुद शिकार कर भोजन करना मसहूस कर रहे हैं। इन्हें बाड़े के बाहर जंगल की ओर विचरण करते चीतल-सांभर की ओर टकटकी लगाए भी देखा जा रहा है। हालाकि एक माह तक चीते बाड़े में ही रहेंगे। इसके बाद ही बड़े बाड़े में छोड़ा जाएगा, जहां इन्हें शिकार उपलब्ध होगा। डीएफओ पीके वर्मा ने बताया कि अभी चीते नींद पूरी कर रहे हैं, भरपेट भोजन भी कर रहे हैं। चीतों के व्यवहार से नामीबिया में बैठे विशेषज्ञ भी संतुष्ट हैं। पीएमओ दिल्ली, साउथ अफ्रीका, नामीबिया, भारतीय वन्यजीव संस्थान के अलावा सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की भी चीतों के पुनर्वास पर नजर है।

इस तरह निगरानीः कूनो डीएफओ पीके वर्मा ने बताया कि इंसानों की मौजूदगी देख चीते विचलित से दिखते हैं। साउथ अफ्रीका और कूनो के वन्यजीव विशेषज्ञ तीन किलोमीटर दूर गाड़ी रखकर, मोबाइल साइलेंट कर चीतों पर नजर रखने पैदल ही जाते हैं। बाड़े से दूर ग्रीन नेट से कवर मचान में केवल आंखों के लायक छेद हैं, इन छेद से ही विशेषज्ञ उनके व्यवहार पर नजर रख रहे है। नामीबिया और साउथ अफ्रीका एक-एक विशेषज्ञ दल लौट चुका है। अब केवल साउथ अफ्रीका के तीन विशेषज्ञों की टीम रुकी है।

नामकरण केलिए पीएम न ेलोगों से मांगे नाम

आठ चीतों में से एक का नाम प्रधानमंत्री मोदी ने आशा रखा था, अन्य केनाम नामीबिया में ही रखे गए हैं। भारत की धरती पर यहां केअनुरूप नाम केलिए प्रधानमंत्री ने लोगों से नाम सुझाने का कहा है। रविवार को प्रसारित मन की बात कार्यक्रम में पीएम नरेन्ध मोदी ने कहा कि चीतों को लेकर हम जो अभियान चला रहे हैं, उसका नाम क्या होना चाहिए? चीतों को किन नामों से बुलाया जाना चाहिए ? इसके लिए माय जीओव्ही एप पर प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। ये नामकरण अगर ट्रेडिशनल हो तो अच्छा रहेगा क्योंकि अपने समाज और संस्कृति, परंपरा और विरासत से जुडी कोई भी चीज हमें अपनी ओर आकर्षित करती है। पीएम मोदी ने कहा कि कुछ ही दिनों बाद देशवासी चीतों को देख सकेंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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