श्योपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

एक तरफ सेहत मिशन के तहत अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने करोड़ों रुपये स्वीकृत किए जा रहे हैं, हाल ही में जिले 13 अस्पतालों की सूरत संवारने के लिए सवा करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है, वहीं दूसरी अस्पतालों में छोटी-छोटी समस्याओं को दूर करने पर अस्पताल प्रगबंधन ध्यान नहीं दे रहा है। उदाहरण के लिए बड़ौदा अस्पताल में लैब टेक्नीशियन नहीं होने से 11 महीने से एक्सरे मशीन बंद है। इसी तरह विजयपुर और कराहल स्वास्थ्य केंद्र पर महिला डाक्टर तक नहीं है, जिस वजह से महिलाओं को इलाज कराने में काफी परेशानी आ रही है।

ज्ञात हो कि, शासन की ओर से सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए मिशन सेहत अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान के तहत श्योपुर जिले के 13 सरकारी अस्पतालों का चयन किया गया है। जिनमें जिला अस्पताल सहित बडौदा, कराहल और विजयपुर में संचालित तीनों सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और 9 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शामिल है। बताया गया है कि जिले के चयनित अस्पतालों में सामान्य मरम्मत और विशेष मरम्मत के कार्य किए जाना है। सामान्य मरम्मत में भवन की रंगाई-पुताई, पेंटिंग, दरवाजे-खिड़कियों की मरम्मत, टूटे हुए कांच बदलना, प्लास्टर का पेच वर्क, जलप्रवाह व्यवस्था दुरूस्त करना ,विद्युत मरम्मत,भवन की फ्लोरिंग की मरम्मत और अस्पताल के मुख्य स्थानों पर साईनेज लगाने के कार्य शामिल हैं। जबकि विशेष मरम्मत के कार्यों में छत की वाटर प्रूफिंग और मरम्मत कार्य, भवन के फर्श का नवीनीकरण, सेनेटरी फिटिंग, ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण,मरम्मत कार्य और साधारण मरम्मत के अतिरिक्त अन्य आवश्यक मरम्मत के बड़े कार्य शामिल हैं। दूसरी तरफ बड़ौदा करीब एक लाख की आबादी को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने वाला बड़ौदा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद अव्यवस्थाओं का शिकार बना है। आलम यह है कि बारिश के मौसम में अस्पताल की छत टपक रही है तो वहीं स्टाफ के अभाव में मरीजों को इलाज तक नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में बीते 11 महीने से एक्सरे की सुविधा नहीं मिल पा रही है। डाक्टर्स और लैब टेक्नीशियन के अलावा अन्य स्टाफ का भी अभाव नजर आ रहा है । विशेषज्ञ डाक्टर, फार्मासिस्ट , लैब टैक्नीशियन , कंप्यूटर ऑपरेटर , प्यून , वार्ड बाय सहित अस्पताल में तमाम रिक्त पद हैं । इससे स्वास्थ्य केंद्र पर ज्यादातर मरीजों की जांच भी नहीं हो पाती है। हालात यह हैं कि मरीजों को तमाम दवाएं तक उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें बाजार से दवा खरीदना पड़ती है। लेकिन बजट होने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन का समस्याओं को दूर करने पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।

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ओपीडी में प्रिंटर खराब होने से नहीं बन रहे पर्चे

जिला अस्पताल में सभी सुविधाए हैं, लेकिन डाक्टर समय पर नही बैठते जिस वजह से मरीज अक्सर परेशान होते रहते हैं। इसके अलावा ओपीडी में जो निजी कंपनी सेवा दे रही है उसके अधिकांश प्रिंटर के खराब होने और बेहद धीमी गति से चलने जैसी परिस्थिति के कारण निर्मित हो रही है। मगर जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान नहीं है। यही वजह है कि सुविधा की बजाय असुविधा पैदा करने के बाद भी अस्पताल में दिखाने आने वाले रोगियों को पर्चा बनवाने का जिम्मा जिस कंपनी को दिया गया है, उसके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि अस्पताल में मौजूद इन हालात से सभी भलीभांति परिचित हैं। बीते दो दिन से ओपीडी समय में पर्चा कटवाने के लिए लगने वाले रोगियों की कतार इस कारण से खासी लंबी हो रही है।

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अगरा और राडे?प पीएचसी को नहीं मिली जगह

मिशन सेहत अभियान के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राडेप और अगरा का चयन नहीं किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राड़ेप में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन के नाम पर कुछ नहीं है। इसलिए वहां नए सिरे से पूरा भवन बनाए जाने का प्रस्ताव अलग से भेजा जाएगा। जबकि अगरा में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की मंजूरी मिल गई है। जिसका काम भी शुरू हो गया है।

वर्जन-

मिशन सेहत अभियान के तहत श्योपुर जिला अस्पताल सहित जिले के 13 अस्पतालों का चयन किया गया है, इसके लिए सवा करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिल गई है, इससे सभी अस्पतालों की सुविधाएं बढेंगी। रही छोटी- मोटी खामिया तो उन्हें हम दूर करेंगे।

डा. बीएल यादव

सीएमएचओ,श्योपुर।

Posted By: Nai Dunia News Network

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