श्योपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। साल 2010 में तीन साल के लिए शहर के बायपास स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास मॉडल-3 की वार्डन बनाई गईं गलमान्या शासकीय स्कूल में पदस्थ शिक्षिका विष्णु शर्मा को 11 साल का कार्यकाल बीत जाने के बाद भी उनकी मूल संस्था पर नहीं भेजा जा सका है। वार्डनों की लंबे समय से छात्रावासों में पदस्थी को लेकर जिले के आला अधिकारी भी जांच के निर्देश दे चुके हैं। 2-3 बार जांच समिति भी गठित की जा चुकी है। डिप्टी कलेक्टर विजेंद्र सिंह यादव ने सोमवार को फिर से डीपीसी को पत्र लिखकर वार्डन विष्णु शर्मा के मामले में लंबित जांच के प्रतिवेदन को शीघ्र प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के अनुसार शिक्षिक-शिक्षिकाओं को छात्रावासों के अधीक्षक या वार्डन 3 साल के लिए बनाए जाने का प्रावधान हैं, फिर भी जिले के जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा सर्व शिक्षा अभियान के तहत संचालित किए जा रहे छात्रावासों में 5-10 और 11 साल पहले से वार्डन बनी हुई शिक्षिकाओं को उनकी मूल संस्थाओं पर वापस नहीं भेजा जा सका है। पिछले लंबे समय से कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास मॉडल-3 वार्डन की सबसे ज्यादा शिकायतें हो रही हैं। डिप्टी कलेक्टर श्री यादव उनके मामले में करीब 6-7 बार डीपीसी को पत्र भेजकर जांच प्रतिवेदन मांग चुके हैं। फिर भी डीपीसी हाईकोर्ट और डिप्टी कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं।

छात्रावासों पर लंबे समय से वार्डन बनी हुई हैं,शिक्षिकाएं :

सर्वशिक्षा अभियान के तहत आने वाले 10 छात्रावासों में से 8 वार्डनों की पदस्थापना नियम विरुद्ध तरीके से पाई जा चुकी है। जिसका प्रतिवेदन भी 2 महीने पहले बनाई गई जांच समिति तैयार करके डीपीसी को सौंप चुकी हैं। लेकिन, अधिकारियों ने वार्डनों को हटाए जाने के बजाए जांच अधिकारियों को ही बदल दिया। इससे नियम विरुद्ध तरीके से वार्डन बनी हुई 8 शिक्षिकाएं अभी भी उन्हीं छात्रावासों को संभाल रही हैं। जिनमें मुख्य रुप से शहर के बायपास स्थित कस्तूरबा गांधी छात्रावास मॉडल-3 की वार्डन विष्णु शर्मा हैं, जो वर्ष 2010 से वर्तमान स्थिति तक यानि करीब 11 साल से वार्डन बनी हैं। इस अवधि में महज एक साल 7 महीने का का समय ही छूटा है। बड़ौदा कस्तूरबा गांधी छात्रावास की वार्डन मीना परमार 12 अक्टूबर 2017 में पदस्थ हुईं जिन्हें दिसंबर 2020 में 3 वर्ष का कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद हटा दिया जाना था, लेकिन अभी तक उन्हें नहीं हटाया जा सका है। उनकी तरह कराहल छात्रावास की वार्डन मुक्ति शर्मा, बालिका छात्रावास बड़ौदा की वार्डन अर्चना गौतम सहित जिले की 8 वार्डनों को निर्धारित समय से ज्यादा समय से वार्डन बना रखा है।

वर्जन :

शिकायत के संबंध में डीपीसी से जांच रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट अभी तक मिल नहीं सकी है, जैसे ही रिपोर्ट आएगी, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

विजेंद्रसिंह यादव, डिप्टी कलेक्टर

Posted By: Nai Dunia News Network

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