श्योपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर सरकार की ओर से भले ही किसानों के कल्याण के लिए बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में इस योजना से जुड़ने वाले किसानों की संख्या हर साल घट रही है। फसल बीमा के तहत मुआवजा पाने को भी धक्के खाने पड़ते हैं। इससे किसानों में पीएम फसल योजना को लेकर रुझान घट रहा है। पांच साल पहले जहां जिलेभर में खरीफ और रबी सीजन के दौरान 41409 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसलों का बीमा करवाया था। वहीं पांच साल बाद अब किसानों की संख्या घटकर 30247 रह गई है।

ज्ञात हो कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 फरवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू किया था। इस स्कीम के तहत 9 फसलों को अधिसूचित किया है। इसके लिए किसानों से खरीफ सीजन में 2 प्रतिशत व रबी सीजन में 1.5 प्रतिशत प्रीमियम लिया जाता है। शुरुआत में फसल बीमा योजना अनिवार्य थी, लेकिन किसानों के लगातार विरोध के बावजूद इसे ऐच्छिक कर दिया। इसके बाद से किसानों का रुझान योजना के प्रति घट रहा है। अब किसानों को अगर इस योजना से नहीं जुड़ना है इसके लिए उन्हें संबंधित बैंक में लिखकर देना होता है। इसके बाद प्रीमियम नहीं काटा जाता। वर्तमान खरीफ सीजन में जिले के करीब 13 हजार किसान ही अभी तक फसल बीमा करा पाए है। जबकि फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई थी। और कृषि विभाग के अधिकारी फसल बीमा कराने को लेकर किसानों को जागरूक कर रहे है। लेकिन इसके बाद भी किसान फसल बीमा कराने को लेकर रूचि नहीं दिखा रहे है।

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बीमा पाने के लिए किसानों को भटकना पड़ता है

पीएम फसल बीमा योजना से पीछे हटने के कई कारण हैं। किसानों को धक्के खाने पड़ते हैं। आवेदन प्रक्रिया को सरल करने के दावे सरकार कर रही है, लेकिन इसके बावजूद बीमा पाने को किसानों को भटकना पड़ता है। किसान नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की कई कमियों के चलते किसान इससे दूर भाग रहे हैं। इस योजना की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसमें पूरे गांव को इकाई माना जाता है। जब पूरे गांव के किसानों की फसल खराब होती है तो ही फसल को खराब माना जाता है। वहीं मुआवजा निकालने का सिस्टम भी ठीक नहीं है। इसके अलावा किसानों को पॉलिसी भी नहीं मिलती। ऐसे में किसानों के पास फसल बीमा का कानूनी रूप से कोई दस्तावेज भी नहीं होता। क्लेम में अगर कोई अड़चन पैदा हो जाए तो किसान की कोई सुनवाई नहीं है। कृषि विभाग के अधिकारी भी अपने हाथ खड़े कर देते हैं। इन्हीं वजहों से किसान उक्त योजना में अब ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे है।

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2021 में 14526 किसानों को मिला बीमा

वर्ष 2020-21 में खरीफ और रबी सीजन के दौरान जिले के 36469 किसानों ने फसल बीमा करवाया था। जिसके तहत बीमा कंपनी ने 14526 किसानों को उनकी फसल नुकसान का मुआवाजा 2176 लाख रूपए उनके खातो में डाला। जबकि वर्ष 2021-22 में दोनो सीजनों के दौरान जिले के 30247 किसानों ने फसल बीमा करवाया था। लेकिन अभी तक किसी भी किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका है। संबंधित विभागीय अधिकारी मुआवजा मिलने के लिए प्रकिया चलने की बात कह रहे है। लेकिन मुआवजा कब मिलेगा,इसको लेकर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बता रहे है।

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खरीफ-रबि सीजन के दौरान फसल बीमा करवाने वाले किसान

वर्ष बीमित किसान लाभांवित किसान

2017-18 41409 9131

2018-19 38212 3633

2019-20 38791 2497

2020-21 36469 14526

2021-22 30247 प्रक्रियारत

वर्जन

फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि तक बहुत कम किसानों ने फसल बीमा कराया है। हां ये बात सही फसल बीमा कराने में किसान कम रूचि दिखा रहे हैं। फसल बीमा के लिए किसानों को जागरूक कर रहे है और बीमा के फायदे भी किसानों को बताए जा रहे है।

पी गुजरे

उप संचालक कृषि,श्योपुर।

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