Cheetah in Madhya Pradesh : हरिओम गौड़, मुरैना। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में लाए गए नामीबिया के आठ चीतों में से एक मादा चीता की सेहत बिगड़ गई है। सात दिन से माता चीता बीमार है, जो शिकार कर रही है नहीं कुछ खा रही है। मादा चीता की बिगड़ी सेहत ने भोपाल से लेकर दिल्ली तक हडकंप मचा दिया है। देश के जाने-माने वन्यजीव विशेषज्ञ साउथ अफ्रीका के चीता विशेषज्ञ डाक्टरों की सहायता लेकर बीमार चीता का इलाज करने में जुटे हैं। वन विभाग के आला अफसरों के अनुसार बीमार चीता की हालत में कुछ सुधार दिख रहा है।

19 जनवरी से बिगड़ी मादा चीता की तबीयत

गौरतलब है, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन 17 सितंबर को नामीबिया से लाए गए आठ (पांच मादा व तीन नर) चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। तीन महीने से ज्यादा समय तक बाड़ों में बंद चीतों को क्रम से खुले जंगल में छोड़ा जा रहा है। इसी में से एक मादा चीता शाशा की तबियत 19 जनवरी से बिगड़ गई है। पांच साल की शाशा नामीबिया से लाए गए सभी आठ चीतों में सबसे ज्यादा उम्र की है। सेहत बिगड़ने के पता वन विभाग की टीम को 19 जनवरी को तब लगा जब शाशा थकी हुई हालत में एक जगह बैठ गई।

बीमार चीता की देखरेख में जुटे

घंटों तक उसने कोई चहल-कदमी नहीं की, नहीं किसी शिकार का पीछा किया। मादा चीता ने शिकार नहीं किया तो ऐसे में उसे मांस डाला गया, लेकिन मादा चीता ने वह भी नहीं खाना, नहीं पानी पीया। इसके बाद भोपाल व दिल्ली के वन्यजीव विशेषज्ञों की एक टीम कूनो नेशनल पार्क में बुलाई गई जो बीते चार दिन से बीमार चीता की देखरेख व इलाज में जुटी है। देश के यह विशेषज्ञ बीमार मादा चीता की सेहत की हर जानकारी साउथ अफ्रीका के विशेषज्ञों को दे रहे हैं और आनलाइन वीडियो कालिंग के जरिए बीमार शाशा के इलाज के टिप्स भी ले रहे हैं। वन विभाग के अनुसार मादा चीता डीहाइड्रेशन का शिकार हुई है और 23 जनवरी से उसकी हालत में कुछ सुधार हो रहा है, लेकिन यह चीता अभी भी सामान्य चीतों की तरह भागदौड़ या शिकार का पीछा नहीं कर रही।

पांच साल की मादा चीता शाशा की तबियत 19 जनवरी से खराब है, वह डीहाइड्रेशन का शिकार हुई है, इसलिए कुछ खा-पी नहीं रही, एक जगह बैठ गई थी। हमारे देश में अच्छे वन्यजीव विशेषज्ञ डाक्टर हैं जो बीमार चीता का इलाज कर रहे हैं, साउथ अफ्रीका के विशेषज्ञों से भी मदद ले रहे हैं। दो-तीन दिन से बीमार चीता की हालत में सुधार दिख रहा है। - जेएस चौहान, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक

Posted By: Prashant Pandey

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